Coal Production: भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से दौड़ रहा है. कोयला मंत्रालय द्वारा जारी ताजा जानकारी के मुताबिक, देश ने 20 मार्च तक ही 1 अरब टन (1 Billion Tonne) कोयला उत्पादन का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है. खास बात यह है कि यह कारनामा लगातार दूसरे साल हुआ है.
हमारे लिए इसके क्या मायने हैं ?
- गर्मी में बिजली कटौती का डर कम: थर्मल पावर प्लांट्स में अब कोयले का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर है. इसका मतलब है कि जब गर्मियों में एसी और पंखों की वजह से बिजली की डिमांड बढ़ेगी, तो पावर प्लांट के पास पर्याप्त ईंधन होगा.
- महंगाई पर लगाम: जब हम अपना कोयला खुद भारी मात्रा में निकालते हैं, तो हमें विदेशों से महंगा कोयला कम खरीदना पड़ता है. इससे विदेशी मुद्रा बचती है और ऊर्जा की कीमतें स्थिर रहती हैं.
- सपनों का भारत (Viksit Bharat 2047): सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है. इसके लिए सीमेंट, स्टील और एल्युमिनियम जैसे उद्योगों को बिना रुके काम करना होगा, जिसके लिए यह रिकॉर्ड उत्पादन एक मज़बूत नींव का काम करेगा.
कैसे मुमकिन हुआ यह सब ?
यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. इसके पीछे मंत्रालय की बेहतर प्लानिंग और खदानों से लेकर रेलवे (जो कोयला ढोता है) के बीच का शानदार तालमेल है. कोयला मंत्रालय ने पारदर्शी नीतियां अपनाईं और परफॉर्मेंस पर कड़ी नर रखी, जिसका नतीजा आज हमारे सामने है.1 अरब टन का लक्ष्य वित्तीय वर्ष खत्म होने (31 मार्च) से 11 दिन पहले ही हासिल कर लेना दिखाता है कि हमारी खदानें और कर्मचारी कितनी तेज़ी से काम कर रहे हैं.
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