डायरेक्ट टैक्स वसूलने में आयकर विभाग की फुल रही हैं सांसें, पार्लियामेंटरी कमेटी के सामने रोया दुखड़ा

Direct Tax: आयकर विभाग ने संसदीय समिति को बताया कि 43 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर बकाये में से 67% की वसूली मुश्किल है. 1990 के दशक से लंबित यह बकाया अब बड़ी चुनौती बन चुका है. समिति ने समाधान के लिए टैक्स माफी और स्थगन जैसे कदम उठाने की सिफारिश की है.

Direct Tax: बकाया डायरेक्ट टैक्स की वसूली करने में आयकर विभाग की सांसें फुलती दिखाई दे रही हैं. विभाग ने संसदीय समिति को जानकारी दी है कि 43 लाख करोड़ रुपये के बकाया डायरेक्ट टैक्स में से दो-तिहाई यानी 67% की वसूली करना मुश्किल है. वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने डायरेक्ट टैक्स के भारी बकाया पर चिंता व्यक्त की और इस समस्या के समाधान के लिए स्थगतिकरण सहित संभावित कदम उठाने की इच्छा जाहिर की.

1990 के दशक से चला आ रहा है बकाया

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने संसद की स्थायी समिति को बताया कि बकाया रकम चिंता का कारण है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास करीब 43,00,000 करोड़ रुपये की बकाया मांग है, जो हमारे लिए चिंता का विषय है. आंशिक रूप से यह पुराने बकाये का मुद्दा है. यह बकाया 1990 के दशक के मध्य से भी संबंधित है, क्योंकि पहले हम अनिवार्य रूप से एक ‘मैनुअल रजिस्टर’ रखते थे.’’

डायरेक्ट टैक्स की डिमांड का बड़ा हिस्सा मनगढ़ंत

वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद में पेश कर दी गई है. राजस्व सचिव ने समिति को बताया कि डायरेक्ट टैक्स की डिमांड का एक बड़ा हिस्सा ‘मनगढ़ंत’ भी है. समिति ने पाया कि डायरेक्ट टैक्स के संबंध में 10,55,906 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया पांच या उससे अधिक साल से लंबित है. रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति को यह समझाया गया है कि कुछ बकाया राशि 1990 के दशक के मध्य से भी पुरानी है.’’

28,95,851 करोड़ की वसूली मुश्किल

इसके साथ ही समिति ने कहा कि कर अधिकारियों के अनुसार, 43,07,201 करोड़ रुपये के बकाये में से 28,95,851 करोड़ रुपये यानी 67% की वसूली मुश्किल है. प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से पहले एक ‘मैनुअल रजिस्टर’ होता था, जिसमें ब्याज का हिसाब नहीं रखा जाता था. हालांकि, वर्तमान प्रणाली अब सालाना ब्याज की गणना करती है.

टैक्स डिमांड होगा माफ

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने सिफारिश की है कि चूंकि सभी कर रिकॉर्ड डिजिटल कर दिए गए हैं, इसलिए समयबद्ध तरीके से बकाया डिमांड के लंबित मामलों को कम करने और उसे पूरा करने के लिए डिमांड को माफ करने अथवा स्थगन लगाने सहित निर्णायक हस्तक्षेप करने का यह सही समय है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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