Credit Card Limit: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में क्रेडिट कार्ड हमारी जेब का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है. चाहे ऑनलाइन शॉपिंग हो या अचानक आया कोई मेडिकल इमरजेंसी, यह कार्ड हर वक्त काम आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही ऑफिस में काम करने वाले दो दोस्तों के क्रेडिट कार्ड की लिमिट अलग-अलग क्यों होती है? असल में, बैंक आपको क्रेडिट लिमिट देने से पहले आपकी फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी का कड़ा इम्तिहान लेते हैं.
कमाई की क्षमता और करियर का ट्रैक रिकॉर्ड
बैंक सबसे पहले यह देखते हैं कि आपकी जेब में हर महीने कितना पैसा आ रहा है. आपकी सैलरी जितनी ज्यादा होगी, बैंक उतना ही बड़ा रिस्क लेने को तैयार रहते हैं. इसके साथ ही, आप एक ही कंपनी में कितने समय से टिके हैं, यह आपकी स्थिरता को दर्शाता है. अगर आप बार-बार नौकरियां बदलते हैं, तो बैंक आपको बड़ी लिमिट देने में हिचकिचा सकते हैं.
CIBIL स्कोर के आधार पर मिलता है लिमिट
क्रेडिट कार्ड की दुनिया में 750 से ऊपर का क्रेडिट स्कोर एक जादुई नंबर की तरह है. यह स्कोर बैंक को बताता है कि आपने पुराने कर्जों की किस्तें और क्रेडिट कार्ड के बिल हमेशा समय पर भरे हैं. अगर आप पर पहले से ही कई लोन चल रहे हैं और आपकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा EMI में जा रहा है, तो बैंक आपकी नई क्रेडिट लिमिट को कम ही रखेंगे ताकि आप पर कर्ज का बोझ ज्यादा न बढ़े.
समय पर भुगतान और बैंकिंग संबंध
जो ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड का बिल आखिरी तारीख से पहले चुकाते हैं, उनके लिए लिमिट बढ़ाना आसान होता है. इसके अलावा, जिस बैंक में आपका पुराना बचत खाता या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है, वहां से आपको ज्यादा लिमिट वाला कार्ड मिलने की संभावना अधिक रहती है.
Also Read: फास्टैग एनुअल पास हुआ महंगा, 1 अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे, फटाफट निपटा लें ये काम
