Homeopathic Medicine: उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का मानना है कि भारत हाई क्वालिटी वाली होम्योपैथिक दवाओं के उत्पादन में तेजी से वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है. पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संगम ने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी है. भारत न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी विश्वसनीयता बढ़ाकर बड़े पैमाने पर निर्यात में बढ़ोतरी भी दर्ज कर रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत में होम्योपैथिक दवाओं की मांग में उल्लेखनीय तेजी आई है. इसके पीछे सस्ती चिकित्सा पद्धति, दुष्प्रभावों का कम जोखिम और प्राकृतिक उपचार प्रणाली पर लोगों का बढ़ता विश्वास प्रमुख कारण हैं.
मेक इन इंडिया से मिला विनिर्माण क्षेत्र को नया आयाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने होम्योपैथिक दवा उद्योग में बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को गति दी है. इस कार्यक्रम के अंतर्गत निर्माताओं को तकनीकी अपग्रेडेशन, उत्पादन क्षमता वृद्धि और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. देशभर की कई दवा कंपनियों ने आधुनिक प्रयोगशालाओं, अत्याधुनिक मशीनरी और स्वचालित उत्पादन लाइनों में निवेश किया है. इससे भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि दुनिया का विश्वसनीय सप्लायर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
जीएमपी मानकों ने बढ़ाई अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता
आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि राजेश्वर तिवारी के अनुसार, सरकार औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमों की अनुसूची एम-1 के तहत जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) को अनिवार्य बनाकर होम्योपैथिक दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही है. जीएमपी अनुपालन को लागू करने से उत्पादन प्रक्रिया विश्वमानकों के अनुरूप हुई है. इसके साथ ही, आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना जैसी सरकारी पहलों ने निर्माताओं को आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं अपनाने को प्रेरित किया है. इन नीतिगत सुधारों से भारतीय दवा कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता बढ़ी है. कई देशों में भारत के होम्योपैथिक उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे निर्यात में निरंतर वृद्धि हो रही है.
गुणवत्ता और प्रामाणिकता की पहचान बना मेड इन इंडिया
सरकार का उद्देश्य होम्योपैथिक चिकित्सा को आधुनिक उद्योग रूप में स्थापित करना है. राजेश्वर तिवारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर पुनर्परिभाषित कर रहा है. सख्त जीएमपी मानकों, आयुष प्रीमियम प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग के जरिए भारत “मेड इन इंडिया” होम्योपैथिक उत्पादों को गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रामाणिकता का प्रतीक बनाने की दिशा में काम कर रहा है. यह प्रयास न केवल उद्योग के विकास को गति दे रहे हैं, बल्कि भारत को समग्र वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं.
निजी क्षेत्र कर रहा बड़ा निवेश
होम्योपैथिक दवा निर्माता एडवेन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ आदेश शर्मा का मानना है कि भारत विश्वसनीयता और क्षमता के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है. उनके अनुसार, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें उद्योग को अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. इससे भारतीय कंपनियाँ वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बना रही हैं, जबकि पारंपरिक चिकित्सा की जड़ों को भी सुरक्षित बनाए हुए हैं. शर्मा का कहना है कि यह संयोजन भारत में होम्योपैथिक क्षेत्र के सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके उदय का आधार बनेगा.
वैश्विक होम्योपैथिक बाजार में भारत सबसे आगे
सरकारी नीतियों, तकनीकी अपग्रेडेशन, कड़े गुणवत्ता मानकों और उद्योग जगत के आधुनिक दृष्टिकोण ने भारत को होम्योपैथिक दवाओं का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में मजबूत किया है. दुनिया भर में प्राकृतिक और वैकल्पिक चिकित्सा की बढ़ती मांग भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी शक्ति बना रही है. आने वाले वर्षों में भारत होम्योपैथिक दवा निर्यात, उत्पादन और अनुसंधान—तीनों आयामों में वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
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भाषा इनपुट के साथ
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