Asset Monetisation: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए देश के हाईवे नेटवर्क को लेकर एक मेगा प्लान तैयार किया है. सरकार देश के 28 राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) से जुड़ी संपत्तियों का मोनेटाइजेशन करके करीब 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. इन हाइवेज की कुल लंबाई 1,800 किलोमीटर से भी ज्यादा है.
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसके लिए हाइवेज की एक लिस्ट भी फाइनल कर ली है, जिसमें हरियाणा के हाईवे सबसे ऊपर हैं और उसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि सरकार इन सड़कों को बेच नहीं रही है. तो फिर यह पूरा गणित काम कैसे करता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
क्या होता है ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ और ‘एसेट रीसाइक्लिंग’?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस समय “एसेट रीसाइक्लिंग” (Asset Recycling) की रणनीति पर काम कर रही है.
सरल शब्दों में समझें तो सरकार पहले से बने-बनाए और चालू हाईवे या एक्सप्रेसवे को किसी को बेचती नहीं है, बल्कि उनका मालिकाना हक अपने पास ही रखती है. सरकार कुछ निश्चित सालों के लिए इन हाइवेज को प्राइवेट कंपनियों या ट्रस्ट को सौंप देती है.
वो कंपनियां सरकार को एकमुश्त (एक साथ) मोटी रकम दे देती हैं और बदले में उस हाईवे को ऑपरेट करने और वहां से टोल वसूलने का अधिकार पा लेती हैं. सरकार को जो एकमुश्त भारी-भरकम रकम मिलती है, उसे तिजोरी में रखने के बजाय सीधे नए नेशनल हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में लगा दिया जाता है. इसी को ‘एसेट रीसाइक्लिंग’ कहते हैं.
म्यूचुअल फंड जैसा ‘InvIT’ मॉडल आएगा काम
इस 35,000 करोड़ रुपये के टारगेट को पूरा करने के लिए सरकार सरकारी और प्राइवेट Infrastructure Investment Trust (InvIT) और टोल ऑपरेटर ट्रांसफर (TOT) रूट का इस्तेमाल करेगी. क्या है InvIT? यह निवेश का एक आधुनिक जरिया है, जो काफी हद तक म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है.
इसमें सरकार अपने तैयार और चालू इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (जैसे हाईवे) को एक ट्रस्ट में डाल देती है और फिर बाजार के निवेशकों से पैसा जुटाती है. जिन निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है, उन्हें उस हाईवे से होने वाली कमाई (टोल टैक्स) में से रेगुलर डिविडेंड या हिस्सेदारी मिलती है.
पिछले साल भी हुई थी बंपर कमाई
यह मॉडल भारत में काफी सफल साबित हो रहा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो.
- वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए 29,000 करोड़ रुपये हासिल हुए थे.
- इसी दौरान मंत्रालय ने अपने पहले ‘पब्लिक InvIT’ के जरिए चार राज्यों में 260 किलोमीटर से ज्यादा लंबे पांच हाईवे सेक्शंस को मोनेटाइज करके 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी.
आगे का क्या है प्लान ?
सरकार की योजना केवल यहीं रुकने की नहीं है. अगले 3 से 5 सालों के भीतर सरकार करीब 1,500 किलोमीटर के अतिरिक्त तैयार और चालू राष्ट्रीय राजमार्गों को भी इस ‘पब्लिक InvIT’ मॉडल में शामिल करेगी.
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