बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए ‘गोवर्धन’ योजना मंजूर, 23731 करोड़ रुपये होंगे खर्च

केंद्र सरकार ने देश में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय एकीकृत ‘गोवर्धन’ योजना को मंजूरी दी है.

सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी. इसका मुख्य उद्देश्य कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) को देश में स्वच्छ ऊर्जा के एक विकल्प के तौर पर बढ़ावा देना है.

योजना के तहत कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, गन्ने की खोई, शहरी जैविक कचरे और दूसरी जैविक सामग्री से बायोगैस तैयार करने पर जोर दिया जाएगा. इससे कचरे का बेहतर इस्तेमाल होगा और किसानों व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कमाई के नए रास्ते भी खुल सकते हैं.

क्या है ‘गोवर्धन’ योजना और इसका मकसद क्या है?

‘गोवर्धन’ योजना का फोकस जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने पर है. इसके तहत अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार करने को बढ़ावा दिया जाएगा.

सरकार का लक्ष्य कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी के उत्पादन को बढ़ाना है. इससे एक तरफ कचरे का उपयोग हो सकेगा, वहीं दूसरी तरफ स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा.

किसानों और ग्रामीण इलाकों को क्या फायदा होगा?

इस योजना का सीधा असर उन इलाकों पर पड़ सकता है जहां कृषि अवशेष और पशुओं का गोबर बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है. इन चीजों को बेकार छोड़ने के बजाय बायोगैस और जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

इससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की आय बढ़ाने के साथ कचरे का बेहतर उपयोग भी संभव होगा. यानी खेत और गांव से निकलने वाली जैविक सामग्री सिर्फ कचरा नहीं रहेगी, बल्कि उससे आर्थिक फायदा लेने का रास्ता बनेगा.

योजना में किन चीजों से बनेगा बायोगैस?

‘गोवर्धन’ योजना के तहत कई तरह की जैविक सामग्री को इस्तेमाल में लाया जाएगा. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • कृषि अवशेष
  • पशुओं का गोबर
  • गन्ने की खोई
  • शहरी जैविक कचरा
  • अन्य जैविक सामग्री

इनसे स्वच्छ ईंधन के साथ जैविक खाद तैयार करने पर भी जोर रहेगा.

असम में क्या बड़ी मंजूरी मिली?

केंद्र सरकार ने असम में 8,970 करोड़ रुपये की लागत से 136 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर चार लेन राजमार्ग को भी मंजूरी दी है. इस परियोजना में बाइपास, पुल, फ्लाईओवर और आपातकालीन लैंडिंग सुविधा शामिल होगी.

इस परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में सरकार जरूरी सुविधाएं, तकनीकी सहायता और आकर्षक कीमत उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी. खास बात यह है कि राजमार्ग परियोजना के साथ सरकार ने बायोगैस योजना के जरिए कचरे के इस्तेमाल और ग्रामीण आय बढ़ाने पर भी जोर दिया है.

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By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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