Gold-Silver Price: निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाने वाला सोना और चांदी इन दिनों बाजार में गोता लगा रहे हैं. साल 2026 की शुरुआत में जिस तेजी ने सबको हैरान किया था, अब वैसी ही ऐतिहासिक गिरावट ने सबको चिंता में डाल दिया है. पिछले 50-55 दिनों के भीतर चांदी अपनी चमक खो चुकी है और सोना भी अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गया है.
कीमतों का उतार-चढ़ाव
साल की शुरुआत में यानी 31 दिसंबर 2025 को सोना ₹1.33 लाख के स्तर पर था, जो महज एक महीने में 29 जनवरी 2026 को रिकॉर्ड ₹1.76 लाख पर पहुँच गया. लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है.
| तारीख | सोने की कीमत (प्रति 100 ग्राम/कैरेट अनुसार) | चांदी की कीमत (प्रति किलो) |
| 29 जनवरी (High) | ₹1,76,121 | ₹3,85,933 |
| 10 फरवरी | ₹1,56,255 | ₹2,59,100 |
| 10 मार्च | ₹1,60,188 | ₹2,70,944 |
| 23 मार्च (Current) | ₹1,35,141 | ₹2,01,500 |
गिरावट के 3 मुख्य कारण
आमतौर पर युद्ध या वैश्विक तनाव के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार कहानी उल्टी है. एक्सपर्ट्स इसके पीछे ये तीन वजहें मान रहे हैं.
- मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अनिश्चितता का माहौल है. निवेशक जोखिम लेने के बजाय अपनी होल्डिंग बेचकर नकद (Cash) इकट्ठा कर रहे हैं ताकि जरूरत के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे.
- भारी प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ गई थीं कि बड़े निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए ऊंचे दामों पर सोना-चांदी बेचना शुरू कर दिया. बाजार में अचानक सप्लाई बढ़ने से कीमतें नीचे आ गईं.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं के आकर्षण को कम कर दिया है.
क्या अभी निवेश करना सही है?
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है. बाजार में चल रही अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अभी नई खरीदारी या बड़ा निवेश करने से बचें. आने वाले हफ्तों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं.
