Economic Survey 2026: 29 जनवरी को पेश हुई इकोनॉमिक सर्वे में उन लोगों के लिए बड़ी बात कही गई है जो जोमैटो, स्विगी या जेप्टो जैसी कंपनियों में डिलीवरी का काम करते हैं. सरकार का कहना है कि इन वर्कर्स की हालत में सुधार की जरूरत है क्योंकि देश में लगभग 40% डिलीवरी पार्टनर्स ऐसे हैं जो महीने के 15 हजार रुपये भी नहीं कमा पा रहे हैं.
खाली बैठने का भी मिलेगा पैसा?
सरकार ने कंपनियों को सलाह दी है कि अब इन वर्कर्स के लिए मिनिमम कमाई तय होनी चाहिए. इसका मतलब है कि चाहे घंटे के हिसाब से हो या काम के हिसाब से, एक तय पैसा मिलना ही चाहिए. साथ ही, एक बहुत अच्छी बात यह कही गई है कि जब डिलीवरी पार्टनर ऑर्डर के इंतजार में खाली खड़ा रहता है, तो उस टाइम का भी कुछ न कुछ पैसा उन्हें मिलना चाहिए.
लोन लेने में आती है बड़ी दिक्कत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन वर्कर्स की कोई पक्की सैलरी नहीं होती, इसलिए जब ये बैंक में लोन लेने जाते हैं, तो इन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. सरकार चाहती है कि कंपनियां और बैंक मिलकर ऐसी पॉलिसी बनाएं जिससे इन लोगों को भी आसानी से लोन मिल सके. सरकार का मानना है कि लोग अपनी मर्जी से यह काम करें, मजबूरी में नहीं.
ऐप और मशीनों का बढ़ता दबाव
आजकल सब कुछ मोबाइल ऐप और उसके सिस्टम (एल्गोरिदम) से चलता है. यही सिस्टम तय करता है कि किसे कितना काम मिलेगा. सरकार ने कहा है कि इस वजह से वर्कर्स पर बहुत ज्यादा प्रेशर रहता है. वे दिन-भर भागदौड़ करते हैं जिससे उनकी सेहत और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है. कंपनियों को अपने वर्कर्स की ट्रेनिंग और उनकी गाड़ियों वगैरह में भी मदद करनी चाहिए.
देश की तरक्की में बड़ा हाथ
भारत में इस तरह का काम करने वालों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. पिछले 4 साल में इनकी गिनती 77 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई है. आने वाले समय में ये लोग देश की कमाई में लाखों करोड़ रुपये का योगदान देंगे. इसलिए सरकार अब इनके हक में कड़े फैसले लेने की तैयारी में है ताकि इन्हें भी सम्मान और सही पैसा मिल सके.
केवल काम न लें इन्वेस्ट भी करें
सरकार ने जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों को दो-टूक कहा है कि वे केवल आर्डर न बढ़वाएं, बल्कि वर्कर्स की ट्रेनिंग और उनकी गाड़ियों पर भी पैसा खर्च करें. अक्सर संसाधन न होने की वजह से ये लोग अपनी स्किल नहीं बढ़ा पाते और इसी काम में फंसे रह जाते हैं. चूंकि हाल ही में कई जगह वेतन को लेकर प्रदर्शन हुए हैं, इसलिए सरकार अब सख्त है ताकि 2030 तक इस सेक्टर को और मजबूत बनाया जा सके.
