Coronavirus impact : फेडरल रिजर्व ने रेपो रेट में की एक फीसदी की बड़ी कटौती, 2008 के स्तर पर पहुंची ब्याज दरें

Coronavirus के बढ़ते संक्रमण का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है. अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने दूसरी बार रेपो रेट में करीब एक फीसदी की कटौती की है. फेडरल रिजर्व की ओर से दूसरी बार रेपो रेट में बड़ी कटौती करने के बाद अब ब्याज दरें वर्ष 2008 के आर्थिक मंदी के स्तर तक पहुंच गयी हैं.

वाशिंगटन : अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को दूर करने तथा निवेशकों का भरोसा कायम रखने के लिए रविवार को नीतिगत ब्याज दर में एक फीसदी की बड़ी कटौती करके इसे करीब करीब शून्य फीसदी कर दिया है. इसके अलावा, उसने 700 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदने का फैसला भी किया है. इस दूसरी कटौती के बाद अमेरिका में नीतिगत ब्याज दर 2008 के आर्थिक संकट के समय के स्तर पर आ गयी है.

फेडरल रिजर्व अल्पकालिक धन के लिए ब्याज दर अब 0-0.25% के स्तर पर आ गयी है. अमेरिका दो सप्ताह में नीतिगत ब्याज दरों में कुल मिलाकर डेढ़ फीसदी की कमी करने के साथ ऋण के लिए धन की उपलब्धता बढ़ाने के कई उपाय कर चुका है. दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी दरों में कटौती की हैं.

कोरोना वायरस से दुनिया भर में 1,56,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं. इस कारण दुनियाभर में 5,800 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है. सिर्फ अमेरिका में इससे 3,700 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 68 लोगों की मौत हो चुकी है. इस महामारी के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हो चुकी है. इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने लगा है. वैज्ञानिक, शोध संस्थान और दवा कंपनियां इस बीमारी का इलाज खोजने की कोशिशों में लगी हैं.

फेडरल रिजर्व ने ऐसे में अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए दो सप्ताह से भी कम समय में नीतिगत ब्याज दर में दूसरी आपातकालीन कटौती की है. इस दूसरी कटौती के बाद अमेरिका में नीतिगत ब्याज दर 2008 के आर्थिक संकट के समय के स्तर पर आ गयी है. नयी नीतिगत ब्याज दरें शून्य से 0.25 प्रतिशत के बीच आ गयी हैं.

फेडरल रिजर्व ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसे में आयी गिरावट की जब तक भरपाई नहीं हो जाती, नीतिगत ब्याज दर को इसी स्तर पर बनाये रखा जाएगा. उसने कहा कि कोरोना वायरस ने समाज को नुकसान पहुंचाया है और अमेरिका समेत कई देशों में आर्थिक गतिविधियों में रुकावटें पैदा की है.

फेडरल रिजर्व के गवर्नर जेरोम पावेल ने कहा कि इसका वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर भी असर हुआ है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा और इससे आर्थिक परिदृश्य को लेकर जोखिम उपस्थित हुआ है. हमने इसे लेकर ठोस प्रतिक्रिया दी है और न सिर्फ ब्याज दर कम किया है, बल्कि तरलता को लेकर भी कदम उठाये हैं.

फेडरल रिजर्व की लगातार आलोचना करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि मैं फेडरल रिजर्व को बधाई देता हूं. बाजार में लोग इससे उत्साहित होंगे. हमने नीतिगत दरों को लगभग शून्य कर दिया है. फेडरल रिजर्व ने इसके साथ ही व्यापक स्तर पर खरीद की भी घोषणा की.

कंपनियों तथा लोगों को बैंक आर्थिक मदद मुहैया करा सकें, इसके लिए फेडरल रिजर्व ने पात्र बैंकों को अल्पकालिक आधार पर कर्ज सुविधा देने का विकल्प भी खोल दिया है. साथ ही, फेडरल रिजर्व ने बैंकों के लिए आरक्षित नकदी का प्रावधान भी हटा दिया है, ताकि वे इस नकदी का इस्तेमाल कर सकें.

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Author: KumarVishwat Sen

Published by: Prabhat Khabar

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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