Economic Survey 2026: भारत के तेल के बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. इकोनॉमिक सर्वे 2026 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अब भारत अपनी तेल की जरूरतों के लिए सिर्फ एक-दो देशों पर निर्भर नहीं है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस साल (अप्रैल से नवंबर के बीच) रूस और सऊदी अरब जैसे पुराने साथियों से तेल की खरीदारी कम हुई है, जबकि अमेरिका से होने वाला आयात लगभग दोगुना हो गया है. आंकड़ों की बात करें, तो पिछले साल अमेरिका से हम करीब 4.6% तेल मंगा रहे थे, जो अब बढ़कर 8.1% हो गया है. इसी तरह यूएई, मिस्र (Egypt) और नाइजीरिया जैसे देशों से भी अब ज्यादा तेल आ रहा है. इसका सीधा मतलब है कि भारत अब दुनिया के अलग-अलग कोनों से तेल खरीदकर अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत कर रहा है.
रूस से दूरी और अमेरिका से नजदीकी क्यों?
ऐसा नहीं है कि रूस से रिश्ते खराब हुए हैं, बस बाजार के समीकरण बदल रहे हैं. सर्वे कहता है कि भारत अब कच्चे तेल के लिए नए ठिकाने तलाश रहा है. लीबिया और ब्राजील जैसे देशों से भी अब भारी मात्रा में तेल आ रहा है. वहीं दूसरी तरफ, पिछले साल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में करीब 24.7% की गिरावट आई है, जिसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों का कम होना है.
रुपये और टैरिफ का खेल
सर्वे में एक दिलचस्प बात रुपये को लेकर कही गई है. इसमें बताया गया है कि फिलहाल भारतीय रुपया अपनी असली काबिलियत से थोड़ा कमज़ोर है, लेकिन यह हमारे लिए एक छिपा हुआ वरदान जैसा है. इससे अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ का असर कम हो जाता है और फिलहाल तेल सस्ता होने की वजह से महंगाई का भी कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है. भारत अब अपनी व्यापार नीति को और ज्यादा स्मार्ट बना रहा है ताकि किसी भी वैश्विक संकट के समय तेल की सप्लाई न रुके.
