Indian railways : लॉकडाउन में अनेक स्थानों पर मेडिसिन पहुंचा रहा ईस्ट कॉस्ट रेलवे

देश में कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के लिए बीते 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के दौरान रेलवे की ओर से भले ही सवारियों के आवागमन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गयी हो, लेकिन वह आवश्यक सेवाओं और जरूरी सामानों की लगातार आपूर्ति कर रही है.

भुवनेश्वर : देश में कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के लिए बीते 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के दौरान रेलवे की ओर से भले ही सवारियों के आवागमन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गयी हो, लेकिन वह आवश्यक सेवाओं और जरूरी सामानों की लगातार आपूर्ति कर रही है. इसी का नतीजा है कि देश के अनेक हिस्सों में लॉकडाउन के दौरान दवाओं समेत जरूरी सामानों की अबाध आपूर्ति की जा रही है. समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार पूर्व तट रेलवे (ईसीओआर) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले विभिन्न स्थानों में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं.

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ईसीओआर के एक अधिकारी ने शनिवार को समाचार एजेंसी से बताया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन को देखते हुए कई पेटी दवाएं विभिन्न रेलवे स्टेशनों को भेजी गयी हैं. दवाओं के पैकेट विजियानगरम, विशाखापत्तनम, संबलपुर और भुवनेश्वर सहित अनेक रेलवे स्टेशनों तक पहुंचाए गये हैं.

अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि विभिन्न स्टेशनों में दवाओं की पेटियों को चढ़ाया और उतारा जा रहा है. शुक्रवार को भुवनेश्वर से 00531 कटक-विशाखापत्तनम पार्सल एक्सप्रेस से कुल 41 पेटियां विजियानगरम भेजी गयीं. इसी प्रकार, अन्य स्थानों पर भी दवाएं भेजी गयीं. उन्होंने बताया कि ईसीओआर जो पार्सल ट्रेनें चला रहा है, उनके जरिए दवाओं के अलावा चिकित्सकीय उपकरणों को भी विभिन्न स्थानों पर भेजा जा रहा है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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