Budget 2026: देश का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार टेक्सटाइल यानी कपड़ा इंडस्ट्री को लेकर कुछ बड़े ऐलान किए हैं. अगर आपको लगता है कि टेक्सटाइल का मतलब सिर्फ पुराने ढर्रे की बुनाई है, तो आप गलत हैं. सरकार अब इसे हाई-टेक बनाने और युवाओं को बड़े मौके देने की तैयारी में है. इस पूरे प्लान का सबसे पहला हिस्सा ‘नेशनल फाइबर स्कीम’ है. इसका सीधा मकसद भारत को सिल्क, ऊन और जूट जैसे नेचुरल धागों के साथ-साथ आज के जमाने के मॉडर्न इंडस्ट्रियल धागों में आत्मनिर्भर बनाना है. यानी अब हमें कच्चे माल के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
क्या अब टेक्सटाइल में भी मिलेगी हाई-टेक जॉब?
जी हां, सरकार का दूसरा बड़ा फोकस ‘टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम’ पर है. इसके जरिए पुरानी फैक्ट्रियों और क्लस्टर्स को नई मशीनों और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से अपडेट किया जाएगा. इसके साथ ही ‘समर्थ 2.0’ को लॉन्च किया गया है, जो खास तौर पर आज की जेनरेशन के लिए है. इसका काम इंडस्ट्री और कॉलेजों के साथ मिलकर आपको ऐसी स्किल्स सिखाना है जो फ्यूचर की डिमांड हैं. वित्त मंत्री चाहती हैं कि हमारे वर्कर्स सिर्फ हुनरमंद ही न हों, बल्कि टेक-सैवी भी हों. तो अब इस सेक्टर में भी आपको सॉफ्टवेयर और एडवांस मशीनरी के साथ काम करने का मौका मिलेगा.
बुनकरों और आर्टिस्ट्स के लिए क्या है खास?
हमारी पारंपरिक कला को नई पहचान देने के लिए ‘नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम’ (NHHP) लाया गया है. यह पुरानी स्कीमों को जोड़कर एक मजबूत सिस्टम बनाएगा जिससे हमारे लोकल बुनकरों और कारीगरों को सीधा फायदा और सही सपोर्ट मिल सके. यह सिर्फ परंपरा बचाने की बात नहीं है, बल्कि इसे ग्लोबल मार्केट के हिसाब से अपग्रेड करने की कोशिश है ताकि हमारे आर्टिस्ट्स की पहचान दुनिया भर में बढ़े और उनकी कमाई में भी इजाफा हो.
क्या मेगा टेक्सटाइल पार्क बदल देगा एक्सपोर्ट का गेम?
आखिर में, वित्त मंत्री ने एक विजनरी कदम उठाते हुए ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ बनाने का प्रस्ताव रखा है. सोचिए एक ऐसी जगह जहां कच्चा माल आने से लेकर फिनिश्ड प्रोडक्ट बनने तक का सारा काम एक ही छत के नीचे होगा. इससे सामान को इधर-उधर ले जाने का खर्चा कम होगा और भारत के बने कपड़े दुनिया भर में सस्ते और कॉम्पिटिटिव रेट पर बिकेंगे. खास बात यह है कि इन पार्क्स में ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स’ पर फोकस रहेगा, जिनका इस्तेमाल हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल जैसे बड़े सेक्टर्स में होता है. यह कदम भारत को ग्लोबल मार्केट का लीडर बना सकता है.
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