Budget 2026: केंद्र सरकार ने बजट 2026 में पश्चिम बंगाल को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे से जुड़ी अहम घोषणाएं की हैं. चुनावों की दहलीज पर खड़े इस राज्य के लिए बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में क्रांतिकारी घोषणाएं की गई हैं.
सबसे बड़ा एलान पूर्व में डांकुनी और पश्चिम में सूरत को जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का है. इसके साथ ही पर्यावरण के अनुकूल माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू करने की योजना भी पेश की गई है.
बुनियादी ढांचे पर 12.2 लाख करोड़ का निवेश
सरकार ने इस साल के बजट में विकास की गति को तेज करने के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजीगत खर्च तय किया है. यह पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है और इसका सीधा असर बंगाल में चल रहे नए रेल और सड़क प्रोजेक्ट्स पर दिखेगा.
चुनावी माहौल के बीच इन घोषणाओं को बंगाल के औद्योगिक कायाकल्प के रूप में देखा जा रहा है. ये प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, तो बंगाल आने वाले दशक में देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स गेटवे बन सकता है.
डांकुनी से सूरत तक नई माल ढुलाई रीढ़
डांकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पूर्वी और पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा. डांकुनी जहां लॉजिस्टिक्स हब के रूप में जाना जाता है, वहीं सूरत टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र है. इस कॉरिडोर से माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी, जिससे जूट, टेक्सटाइल, एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा. परिवहन लागत घटने से निर्यात प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
नए फ्रेट कॉरिडोर से पश्चिम बंगाल के औद्योगिक इलाकों में निवेश आकर्षित होने की संभावना है. समयबद्ध कार्गो मूवमेंट से सप्लाई चेन सुधरेगी और बंदरगाहों, वेयरहाउसिंग व मल्टी-मॉडल हब्स को नई गति मिलेगी. इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
हरित माल ढुलाई पर सरकार का फोकस
बजट में अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालित करने की घोषणा की गई है. इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करते हुए पर्यावरण के अनुकूल कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देना है. जलमार्गों के विस्तार से भारी माल ढुलाई सस्ती होगी और सड़क व रेल पर दबाव कम पड़ेगा.
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए पूंजीगत खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा खर्च आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को गति देगा.
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