Budget 2025 Expectations: साइबर ठगों की खैर नहीं, सेना को कमान सौंपकर तगड़ा इंतजाम कर सकती है सरकार

Budget 2025 Expectations: सेना और साइबर सुरक्षा पर खास ध्यान देते हुए इस बार रक्षा बजट में 7 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है. स्वदेशी उत्पादन, सीमाओं की सुरक्षा और पूर्व सैनिकों के कल्याण पर विशेष जोर देने की उम्मीद की जा रहीं है.

Budget 2025 Expectations: बजट 2025 में भारतीय सेना को आत्मनिर्भर और अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जा सकता है. स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने, सीमाओं पर सुरक्षा सुधार, साइबर खतरों से निपटने और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए ठोस योजनाएं इस बजट की मुख्य विशेषताएं हो सकती हैं. इस वर्ष के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में वृद्धि की संभावना है. पिछले वित्तीय वर्ष में यह बजट 6.21 लाख करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 7 लाख करोड़ रुपये तक ले जाया जा सकता है.

साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान

साइबर खतरों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए, इस बजट में डिजिटल सुरक्षा पर अधिक फोकस किया जा सकता है. रक्षा बजट का एक हिस्सा साइबर हमलों से निपटने और सैन्य प्रणाली की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए खर्च किया जा सकता है. यह पहल राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगी.

स्वदेशी रक्षा उपकरण निर्माण को प्राथमिकता

“मेक इन इंडिया” के तहत सरकार घरेलू रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर सकती है. अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया जा सकता है ताकि हथियार और उपकरण भारत में ही निर्मित हों. यह न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगा.

सीमा सुरक्षा और आधारभूत ढांचे में सुधार

सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से, सीमा सुरक्षा बलों के लिए अधिक फंड आवंटित किया जा सकता है. निगरानी तंत्र को उन्नत बनाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. यह कदम सीमा पर तैनात जवानों के काम को अधिक कुशल बनाने में सहायक होगा.

पूर्व सैनिकों के लिए विशेष योजनाएं

पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए बजट में विशेष प्रावधान होने की संभावना है. इसमें पेंशन योजनाओं में सुधार, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और रोजगार सृजन जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. ये उपाय उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने और समाज में उनका योगदान बढ़ाने में मदद करेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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