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आम बजट में विशेषज्ञों और करदाताओं को छूट सीमा बढ़ाये जाने की उम्मीद

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
सोशल मीडिया

नयी दिल्ली : वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए एक फरवरी को आम बजट पेश किया जाना है. कोरोना संकट काल के बीच पेश किये जानेवाले आम बजट को लेकर आमलोगों को काफी उम्मीदें हैं. वहीं, करदाताओं की नजर भी आम बजट पर टिकी हैं.

विशेषज्ञों और करदाताओं को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए एक फरवरी को पेश किये जानेवाले बजट में राहत दी जा सकती है. विशेषज्ञों ने उम्मीद जतायी है कि आयकर की धारा 80सी के तहत मिलनेवाली छूट की सीमा को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बढ़ा सकती हैं.

मालूम हो कि आयकर की धारा 80सी के तहत निवेश में छूट की सीमा वर्तमान में 1.5 लाख रुपये है. विशेषज्ञों और करदाताओं को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए पेश किये जानेवाले बजट में इस धारा के तहत छूट की सीमा तीन लाख रुपये तक की जा सकती है.

अधिकृत वित्तीय विश्लेषक के मुताबिक, आयकर की धारा 80सी के तहत डिडक्शन लिमिट बढ़ा कर तीन लाख रुपये किये जाने की उम्मीद है. ऐसा होने पर निवेश में बढ़ोतरी होगी और अर्थव्यवस्था में विस्तार होगा.

अधिकृत वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में लंबे समय की बचत योजनाओं के लिए ऐसी कोई टैक्स पॉलिसी नहीं है, जिससे प्रोत्साहन मिले. लंबे समय की बचत योजनाओं में निवेश बढ़ने पर अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

कोरोना संकट काल में जीवन बीमा और पेंशन बीमा योजना पर इसके लिए सरकार को लंबी अवधि की बचत और कम समय की बचत को ध्यान में रखते हुए खास नियम पर जोर देना होगा. जीवन बीमा और पेंशन बीमा लंबी अवधि की बचत के मुख्य स्रोत हैं. इसलिए सरकार 80सी के तहत छूट पर विचार कर सकती है.

इसके अलावा फिनांसियल सिक्योरिटीज चलानेवाले एक फर्म ने भी 80सी की छूट सीमा 2.5 लाख रुपये किये जाने की उम्मीद जतायी है. फर्म का मानना है कि रीयल एस्टेट को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ऐसी नीतियां ला सकती है. इससे होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर छूट लिमिट में बढ़ोतरी होगी.

करदाताओं को भी बजट से काफी उम्मीदें हैं. कोरोना संकट काल की मार सह रहे करदाता व्यक्तिगत कर में छूट की उम्मीद कर रहे हैं. फिक्की के एक सर्वेक्षण में भी करीब 40 फीसदी लोग प्रत्यक्ष कर प्रस्ताव में छूट की उम्मीद कर रहे हैं.

वहीं, करीब 47 फीसदी लोगों की चाहत प्रत्यक्ष करों के स्लैब बढ़ाने की है. इसके अलावा 52 फीसदी लोगों ने टैक्स रिफंड, 49 फीसदी लोगों ने टैक्स अनुपालन और 43 फीसदी ने टैक्स मुकदमेबाजी की समस्या भी बतायी है.

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