Bikaji Founder Death: भारत में जब भी भुजिया और नमकीन की बात होती है, ‘बीकाजी’ का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. इस बड़े साम्राज्य को खड़ा करने वाले शिव रतन अग्रवाल अब हमारे बीच नहीं रहे. 23 अप्रैल 2026 को चेन्नई में उनका निधन हो गया. 75 वर्ष की आयु में उन्होंने आखिरी सांस ली. उनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां सिर्फ 8वीं तक की पढ़ाई करने वाले एक व्यक्ति ने अपनी मेहनत और समझ से दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया.
विरासत से अलग अपनी पहचान कैसे बनाई?
शिव रतन अग्रवाल जी का जन्म राजस्थान के बीकानेर में हुआ था. वह ‘हल्दीराम’ के संस्थापक गंगाबिशन अग्रवाल के पोते थे. उनके खून में ही जायका और व्यापार था, लेकिन उन्होंने विरासत के भरोसे बैठने के बजाय अपनी अलग राह चुनी. 1986 में उन्होंने ‘शिवदीप प्रोडक्ट्स’ की शुरुआत की, जिसे बाद में 1993 में बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल का नाम दिया गया. उन्होंने बीकानेर के पारंपरिक स्वाद को आधुनिक पैकेजिंग के साथ जोड़कर उसे घर-घर तक पहुंचाया.
कामयाबी का आंकड़ा कितना बड़ा है?
आज बीकाजी केवल एक नाम नहीं, बल्कि शेयर बाजार का एक बड़ा खिलाड़ी है. उनकी कंपनी की मार्केट वैल्यू 19,621 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई है. शिव रतन अग्रवाल जी की खुद की संपत्ति (Net Worth) करीब 15,279 करोड़ रुपये थी. उन्होंने न केवल भुजिया, बल्कि पापड़, मिठाई और रेडी-टू-ईट स्नैक्स के बाजार में भी बड़ी विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी. ब्रांड को और लोकप्रिय बनाने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारों को अपना एंबेसडर बनाया.
अब कौन संभालेगा बीकाजी की कमान?
शिव रतन अग्रवाल जी के निधन की जानकारी कंपनी ने शेयर बाजार को दी. उनके जाने के बाद अब व्यापार की जिम्मेदारी उनके बेटे दीपक अग्रवाल और पेशेवर मैनेजमेंट टीम पर होगी.
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