ADB ने कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए तीन गुना बढ़ायी वित्तीय सहायता, भारत को देगा 20 अरब डॉलर

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने सोमवार को कहा कि उसने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सदस्य देशों के लिए वित्तीय पैकेज को तीन गुना बढ़ाकर 20 अरब डॉलर कर दिया है.

नयी दिल्ली : एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने सोमवार को कहा कि उसने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सदस्य देशों के लिए वित्तीय पैकेज को तीन गुना बढ़ाकर 20 अरब डॉलर कर दिया है. एडीबी ने यह भी कहा कि उसने इस सहायता के तेजी से और बेहतर तरीके से वितरण को लेकर अपना कामकाज दुरूस्त करने के उपायों को भी मंजूरी दी है.

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बहुपक्षीय वित्त पोषण एजेंसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इससे पहले एडीबी ने 18 मार्च को 6.5 अरब डॉलर के शुरुआती पैकेज की घोषणा की थी. बाद में अपने विकासशील सदस्य देशों की कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों के स्वास्थ्य और वृहद आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद को लेकर 13.5 अरब डॉलर की सहायता और देने की घोषणा की गयी है. इसमें कहा गया है कि 20 अरब डॉलर के पैकेज में करीब 2.5 अरब डॉलर का रियायती और अनुदान के रूप में दिये जाने वाले संसाधन भी शामिल हैं.

एडीबी के अध्यक्ष मसात्सुगु असाकावा ने कहा कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान जो आर्थिक, सामाजिक विकास हुए हैं, इस महामारी ने उसे जोखिम में डाल दिया है. इसे गरीबी उन्मूलन के मामले में प्रगति को पलट दिया है और अर्थव्यवस्था को मंदी की तरफ ढकेल दिया है. उन्होंने कहा कि इस पैकेज से विकासशील सदस्य देशों को महामारी के कारण उत्पन्न चुनौती और आर्थिक नरमी से निपटने में मदद मिलेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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