Energy Crisis Impact: इस साल AC कंपनियों के लिए सीजन की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है. आमतौर पर मार्च में गर्मी बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर और दूसरे कूलिंग प्रोडक्ट्स की बिक्री तेज हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम ने खेल बिगाड़ दिया है.
देश के कई हिस्सों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) के कारण हुई बेमौसम बारिश ने तापमान को नीचे बनाए रखा, जिससे डिमांड पर असर पड़ा है. इसके साथ ही बढ़ती महंगाई और कच्चे माल की कीमतों ने कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हालांकि इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अप्रैल में गर्मी रफ्तार पकड़ेगी और बाजार में सुधार देखने को मिलेगा.
मौसम और महंगाई का डबल असर
AC इंडस्ट्री पूरी तरह मौसम पर निर्भर करती है और इस बार मौसम ने ही सबसे बड़ा झटका दिया है. मार्च में ठंडे मौसम और बारिश की वजह से ग्राहकों ने AC खरीदने में जल्दबाजी नहीं दिखाई. वहीं दूसरी तरफ, वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव का असर कच्चे माल की कीमतों पर पड़ रहा है.
खासकर प्लास्टिक महंगा हो गया है, जो AC, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. इसके अलावा LPG गैस की सीमित सप्लाई भी कंपनियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है. सरकार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है, जिससे इंडस्ट्री को मिलने वाली गैस कम हो गई है. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है.
उत्पादन, कीमत और ग्राहकों पर असर
बढ़ती लागत और कच्चे माल की महंगाई का असर अब सीधे ग्राहकों पर पड़ने वाला है. कंपनियों का कहना है कि पहले ही नए एनर्जी लेबलिंग नियमों के कारण कीमतें बढ़ चुकी हैं, और अब अप्रैल से AC के दाम 5-10% तक और बढ़ सकते हैं. इतना ही नहीं, LPG की कमी के चलते कंपनियों को 20-30% तक उत्पादन घटाने की नौबत भी आ सकती है, क्योंकि AC बनाने में पेंटिंग और ड्राइंग जैसी प्रक्रियाओं में गैस का इस्तेमाल होता है.
अगर उत्पादन कम होता है और मांग अचानक बढ़ती है, तो बाजार में सप्लाई की कमी भी देखने को मिल सकती है. ऐसे में ग्राहकों को या तो ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी या फिर कम क्षमता वाले सस्ते विकल्प चुनने पड़ सकते हैं. कुल मिलाकर, इस बार AC इंडस्ट्री के सामने मौसम और महंगाई दोनों बड़ी चुनौती हैं, जिसका सीधा असर बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है.
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