8th Pay Commission: भारत के करीब 1.25 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आ रही है. सरकार जल्द ही 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन कर सकती है, जिससे न केवल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आने की उम्मीद है. यह नया आयोग 2016 से चल रहे 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा.
इस बार सैलरी में कितना बड़ा उछाल?
पिछले यानी 7वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी में करीब 14% की बढ़ोतरी हुई थी, जो कई लोगों को कम लगी थी. लेकिन इस बार एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेतन और पेंशन में 30% से 34% तक की भारी वृद्धि देखी जा सकती है.
अगर इसे फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से समझें, तो यह 1.9 से लेकर 3.0 के बीच रह सकता है. आसान भाषा में कहें तो, आपकी बेसिक सैलरी और भत्तों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़त होने की संभावना है.
सरकार की जेब पर कितना बोझ?
नया वेतनमान लागू होने से केंद्र सरकार के खर्चे भी बढ़ेंगे. अनुमान है कि सरकार को करीब ₹1.8 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा. केंद्र के इस फैसले के बाद राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा सकती हैं, जिससे राज्यों के खर्च में भी बढ़ोत्तरी होगी. हालांकि, सरकार का मानना है कि जब लोगों के पास ज्यादा पैसा आएगा, तो वे खर्च भी ज्यादा करेंगे, जिससे व्यापार और बाजार को फायदा होगा.
सैलरी में कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?
फिनांशल एक्सपर्ट और GenZCFo के फाउंडर, CA मनीष मिश्रा के मुताबिक, इस बार फिटमेंट फैक्टर यानी वह पैमाना जिससे सैलरी बढ़ती है 1.9 से लेकर 3.0 के बीच रहने की संभावना है.
एम्बिट (Ambit) की रिपोर्ट और एक्स्पर्ट के गणित को समझें तो:
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी अभी ₹50,000 है और 2025 के अंत तक महंगाई भत्ता (DA) 60% तक पहुंच जाता है. तो 8वें वेतन आयोग के लागू होते ही सैलरी में 14% से लेकर 34% तक का सीधा इजाफा देखा जा सकता है। यह बढ़ोतरी पिछले वेतन आयोगों के मुकाबले काफी अधिक और उदार हो सकती है।
मार्केट और आपकी बचत पर असर
जब देश के करोड़ों परिवारों की कमाई बढ़ेगी, तो इसका सीधा असर बाजार पर दिखेगा. लोग नए घर, गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की खरीदारी ज्यादा करेंगे, जिससे कंज्यूमर स्पेंडिंग में भारी तेजी आएगी.
साथ ही, सरकार ने 2026 के लिए जो आयकर में कटौती का एलान किया है, वह और बढ़ी हुई सैलरी मिलकर कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाएगी. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस कदम से न केवल लोगों की बचत बढ़ेगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई और मजबूत रफ्तार मिलेगी.
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