सस्ती बिजली के लिए अक्षय उर्जा क्षेत्र में नवोन्मेषण चाहते हैं नरेंद्र मोदी

नयी दिल्ली :ऊर्जाके सीमित संसाधन व आयात की ऊंची लागत के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि सौर व पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों में नवोन्मेषण व शोध पर जोर दिया जाए. इससे प्रत्येक परिवार को उचित मूल्य पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी. मोदी ने आज यहां पहली अक्षय उर्जा वैश्विक निवेशक बैठक […]

नयी दिल्ली :ऊर्जाके सीमित संसाधन व आयात की ऊंची लागत के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि सौर व पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों में नवोन्मेषण व शोध पर जोर दिया जाए. इससे प्रत्येक परिवार को उचित मूल्य पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी. मोदी ने आज यहां पहली अक्षय उर्जा वैश्विक निवेशक बैठक (आरई-इन्वेस्ट) को संबोधित करते हुए प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने के लिए प्रचुर मात्रा में सौर उर्जा संपन्न 50 राष्‍ट्रों का समूह बनाने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्‍होंने कहा, ‘हमें काम की गति बढाने की जरुरत है और इसी के साथ विकास की नये स्तर पर पहुंचने की जरुरत है और इनमें से एक क्षेत्र ऊर्जा है.’ गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव के आधार पर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल सिंचाई पंप चलाने व सूक्ष्म सिंचाई के जरिये फसल की उत्पादकता बढाने के लिए किया जा सकता है.

उस समय नहरों के उपर केवल सौर पैनल न केवल बिजली उत्पादन बल्कि जल वाष्पीकरण में 40 फीसद कमी के लिए भी लगाए गये थे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम अक्षय ऊर्जा पर ध्यान सिर्फ ‘साहस’ के लिए नहीं, बल्कि गरीबों के घरों तक रोशनी पहुंचाने के लिए कर रहे हैं जिससे उनके जीवन में बदलाव लाया जा सके. हमारे पास तालाब हैं, क्या हम इन पर सौर पैनल पर विचार कर सकते हैं.

हमने नवोन्मेषी विचार सोचने होंगे.’ मोदी ने बताया कि सौर फोटोवोल्टिक सेल्स से बिजली की लागत 20 रुपये प्रति यूनिट से घटकर 7.50 रुपये प्रति यूनिट पर आ गई है. शोध और अनुसंधान से इसे और नीचे लाया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा के जरिये हाइब्रिड बिजली उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. इससे पारेषण व बिजली निकासी की ढांचागत लागत में कमी आएगी.

मोदी ने अक्षय ऊर्जा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण पर भी जोर दिया जिससे रोजगार का सृजन होगा. उन्‍होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण आज समय की जरुरत है. ‘जितनी उर्जा हम बचाएंगे, उतनी हम अगली पीढियों के लिए बचा सकेंगे. उर्जा पीढियों के लिए ‘बचाव करने वाली’ साबित हो सकती है.

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