#Cashless_Economy : 2022 तक 32,000 अरब रुपये तक पहुंच जायेगा E-Wallet Transaction

मुंबई : मोदी सरकार के नोटबंदी लागू करने के बाद कैशलेस इकोनॉमी ने जोर पकड़ा. इसमें ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मॉबाइल वॉलेट का क्रेज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यह रफ्तार आनेवाले दिनों में और तेज होगी. कंसल्टैंसी कंपनी डिलॉयट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना 126 प्रतिशत की दर से बढ़ते […]

मुंबई : मोदी सरकार के नोटबंदी लागू करने के बाद कैशलेस इकोनॉमी ने जोर पकड़ा. इसमें ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मॉबाइल वॉलेट का क्रेज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यह रफ्तार आनेवाले दिनों में और तेज होगी.

कंसल्टैंसी कंपनी डिलॉयट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना 126 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए मूल्य के हिसाब से मोबाइल वॉलेट से लेनदेन 2022 तक 32,000 अरब रुपये पर पहुंच जायेगा. मोबाइल वॉलेट से लेनदेन की संख्या में हर साल 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल इंटरनेट और स्मार्टफोन के विस्तार से मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल इस्तेमाल और बढ़ेगा. इसके इस्तेमाल में सहूलियत से मोबाइल वॉलेट पेमेंट और लोकप्रिय होगा.

हालांकि इस रिपोर्ट में इससे जुड़ी कुछचुनौतियों का भी शामिल किया गया. इसमें सबसे बड़ी चुनौती नकद लेनदेन को बताया गया है. यूजर्स आज भी ई-पेमेंट की जगह नकद लेनदेन को सुरक्षित समझते हैं. इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी एक मुख्य चुनौती है.

इसके साथ ही, ऑनलाईन फ्रॉड और फाइनेंशियल सिक्योरिटी इश्यू भी डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी की मुख्य परेशानियां हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सब से निबटने के लिए साइबर सिक्योरिटी सिस्टम की मुस्तैदीजरूरी है.

यूपीआई के आने के बाद इस क्षेत्र में प्रतियोगिता में बढ़ोतरी हुई है और कंपनियां यूजर्स को मोबाइल वॉलेट से जुड़ी नयी सर्विस पेश कर रही हैं. डिलॉयट की यह रिपोर्ट बताती है कि यूनीकपेमेंट इंटरफेस, यानी यूपीआई की शुरुआत से इस क्षेत्र में कंपीटिशन बढ़ा है.

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