Bihar Train News: सासाराम. बिक्रमगंज रेलवे स्टेशन पर बुधवार को रेल यात्री संघ के बैनर तले स्टेशन परिसर में धरना दिया गया. धरने का नेतृत्व कर रहे कृष्ण कुमार सिंह ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर ट्रेन का ठहराव शुरू नहीं हुआ, तो लोग आमरण अनशन पर बैठेंगे. धरना पर बैठे लोगों ने बताया कि बिक्रमगंज के रास्ते आरा और बक्सर से रांची के लिए करीब 25 बसें प्रतिदिन चलती हैं, जिनसे 200 से 300 यात्री सफर करते हैं. महिलाओं और बुजुर्गों को बस यात्रा में भारी परेशानी होती है, जबकि रेलवे सुविधा होने के बावजूद बिक्रमगंज स्टेशन पर ठहराव नहीं दिया जाना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है.
आमरण अनशन की चेतावनी
धरना में शामिल लोगों ने बताया कि जब ट्रेन की शुरुआत हुई थी, तभी से बिक्रमगंज में इसके ठहराव की मांग उठाई जा रही है. तब भी चक्का जाम कर विरोध किया गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से ट्रेन को बिक्रमगंज के बजाय पिरो स्टेशन पर रोक दिया गया. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, बिक्रमगंज से रेलवे को प्रतिदिन जितनी आमदनी होती है, उतनी पिरो से पूरे साल में भी नहीं होती, इसके बावजूद ट्रेन का ठहराव पिरो को दिया गया है, जो अन्यायपूर्ण है. धरने में रविन्द्र यादव, राजन यादव, अशोक चौधरी, रामसूरत सिंह, मुन्ना सिंह, फिरोज़ खान, सुरेंद्र सिंह, नागेंद्र सिंह, अनिल पासवान, शमशुल खान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए.
बस और ट्रेन का किराया
रेल मार्ग से आरा से रांची तक स्लीपर में किराया 315 रुपये है. वहीं थर्ड एसी 845 रुपये है और सेकेंड एसी 1205 रुपये है. बिक्रमगंज से रांची जाने वाली बसों का एसी स्लीपर किराया 600 से लेकर 700 रुपये और सामान्य सीट का 500 से लेकर 600 तक वसूला जाता है.
राजनीतिक श्रेय की खींचतान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पहले आरा-रांची एक्सप्रेस के बिक्रमगंज ठहराव को लेकर राजनीतिक हलकों में श्रेय लेने की होड़ मच गई थी. सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक यह चर्चा गर्म थी कि किस नेता ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर यह ठहराव मंजूर करवाया. रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, माले सांसद राजाराम सिंह और पूर्व विधायक राजेश्वर राज का नाम खासतौर पर चर्चा में था. अंततः रेल मंत्री ने 25 मई को पत्र जारी कर राजेश्वर राज को इसका श्रेय दिया.
Also Read: Bihar election 2025: महागठबंधन के साथ हाथ मिला सकती है AIMIM, बस एक बड़ी शर्त पर फंसा पेंच!
