Bihar News: लघु उद्योग और स्टार्टअप नीति से बदल रहा बिहार, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

Bihar News: बिहार लघु उद्यमी योजना और बिहार स्टार्टअप नीति के तहत भी क्रमशः 10963 और 226 महिलाएं लाभान्वित हुई हैं. मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है.

Bihar News: पटना. बिहार सरकार महिलाओं को उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग योजनाओं का लाभ दिया गया है. मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है. इस योजना के अंतर्गत अब तक 8787 महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं और उनके बीच कुल 608.91 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है.

उद्यमिता के लिए प्रेरित हो रही महिलाएं

मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करना, उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. योजना के तहत महिलाओं को परियोजना राशि के रूप में अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 50 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये) तक की राशि ब्याज मुक्त ऋण के रूप में भी दी जाती है, जिसे 7 वर्षों में वापस करना होता है.

पांच लाख तक का मिल रहा अनुदान

मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के अंतर्गत महिलाओं को कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये) तक की राशि अनुदान के रूप में भी दी जाती है. इसके साथ ही उन्हें व्यवसाय शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाता है. योजना के लाभार्थियों को मार्केट प्लेस पर अपने उत्पादों के प्रचार, बिजनेस सलाहकार की मदद, और अन्य प्रकार की सहायक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं.

स्थानीय मांग को पूरा करने की क्षमता

मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदक को बिहार राज्य की स्थायी निवासी होना चाहिए. उसकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच की होनी चाहिए. इस योजना की एक विशेष बात यह भी है कि इसका लाभ ट्रांसजेंडर समुदाय को भी दिया जा रहा है. योजना के तहत लाभान्वित महिलाओं केंद्र से शुरू किए गए व्यवसायों में सबसे अधिक लोकप्रिय क्षेत्र रेडीमेड गारमेंट्स, आटा, सत्तू और बेसन बनाना, तथा नोटबुक और कॉपी बनाना हैं. ये क्षेत्र न केवल स्थानीय मांग को पूरा कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं.

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