Kurtha Vidhan Sabha: राजद के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में एनडीए, लोकसभा में RJD को मिली थी बढ़त

Kurtha Vidhan Sabha: कुर्था पहले नक्सल हिंसा और जातीय झगड़ों के लिए जाना जाता था लेकिन अब शांत और बदलते हुए इलाके के रूप में देखा जा रहा है. यहां की राजनीति पूरी तरह ग्रामीण वोटरों पर टिकी है. 2025 का चुनाव तय करेगा कि राजद की पकड़ बरकरार रहती है या नहीं.

Kurtha Vidhan Sabha: बिहार के अरवल जिले का कुर्था प्रखंड राज्य के मगध अंचल में स्थित है. यह ब्लॉक अरवल से 23 किलोमीटर पूर्व और जहानाबाद से 25 किलोमीटर दूर है. आसपास के मुख्य नगरों में मखदुमपुर, मसौढ़ी, रफीगंज और जहानाबाद शामिल हैं. सोन नदी के समीप स्थित होने के कारण यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है, जहां धान, गेहूं और दलहन की अच्छी खेती होती है.

नक्सल प्रभावित था यह इलाका

कभी यह क्षेत्र नक्सल के प्रभाव में हुआ करता था, खासकर 1990 और 2000 के दशक में, जब यह नक्सलियों के लिए एक मार्गीय गलियारा था. हालांकि 2020 के बाद से हालात में बड़ा बदलाव आया है. ऑपरेशन ऑक्टोपस जैसे सुरक्षा अभियानों के चलते अब यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत है, हालांकि कुछ गांव जैसे सांगमा, देवपुर और पारसी अब भी संवेदनशील माने जाते हैं. गृह मंत्रालय ने इसे अब कम तीव्रता वाला क्षेत्र घोषित किया है.

जातीय समीकरण

2011 की जनगणना के अनुसार कुर्था का क्षेत्रफल लगभग 122 वर्ग किलोमीटर है और कुल जनसंख्या 1.21 लाख के आसपास थी. साक्षरता दर 51.83% है जो राज्य औसत से काफी कम है और महिलाओं में तो यह महज 41.86% तक सीमित है. कुल 70 गांव हैं जिनमें से एक-तिहाई की आबादी 1000 से भी कम है.

बिहार चुनाव की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

पिछले विधानसभा चुनाव का हाल

2020 में राजद के बगी कुमार वर्मा ने जदयू के पूर्व मंत्री सत्यदेव सिंह को 27810 वोटों से हराया था. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी राजद को कुर्था में बढ़त मिली, जिससे 2025 में एनडीए के लिए इस सीट को फिर से रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. यहां कुशवाहा, यादव और भूमिहार जाति की निर्णायक भूमिका है. अनुसूचित जातियां करीब 19%, और मुस्लिम आबादी 8.3% है. यहां की समूची आबादी ग्रामीण है. 2020 में कुल पंजीकृत मतदाता 2.48 लाख थे, जिसमें से केवल 55.21% ने मतदान किया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.