Goh Vidhan Sabha: महागठबंधन के लिए मजबूत गढ़ बना गोह विधानसभा, एनडीए में मत विभाजन बना हार की वजह

Goh Vidhan Sabha: बिहार के औरंगाबाद जिले का गोह प्रखंड मौर्यकाल से लेकर शेरशाही के दौर तक के इतिहास को अपने में समेटे हुए है. हालिया चुनावों में जातीय और राजनीतिक समीकरणों ने इसे एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना दिया है.

Goh Vidhan Sabha: औरंगाबाद जिले के दाउदनगर अनुमंडल में स्थित गोह विधानसभा क्षेत्र के लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं. सोन और उसकी सहायक नदियों से गोह की जमीन सिंचित होती है. 2011 की जनगणना के अनुसार गोह की जनसंख्या 234400 थी. इस क्षेत्र में साक्षरता दर 53.66% है, जो राज्य की औसत दर से कम है.

सभी दलों का रहा है बोलबाला

1951 में स्थापित गोह विधानसभा क्षेत्र, काराकाट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यहां अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस, भाकपा और जदयू ने चार-चार बार जीत दर्ज की है. सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भाजपा और राजद ने एक-एक बार यह सीट जीती है.

राजद ने पहली जीत हासिल की

2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने पहली बार यह सीट अपने नाम की. भीम कुमार सिंह ने भाजपा के मनोज कुमार शर्मा को 35618 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा तीसरे स्थान पर रहे. सीपीआई(एमएल) के राजा राम सिंह कुशवाहा ने जीत दर्ज की. पवन सिंह ने भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे. वोटों के बंटवारे ने सीपीआई(एमएल) को सीधा लाभ पहुंचा.

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समीकरण

गोह विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 20.72 और मुस्लिम मतदाता 8.4 प्रतिशत रहते हैं. 2020 में यहां कुल 308689 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 59.92% ने मतदान किया. 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 317251 हो गया.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.