Asthawan Vidhan Sabha Chunav 2025: अस्थावां में जीतेंद्र कुमार की अजेय पारी जारी

Asthawan Vidhan Sabha Chunav 2025: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अस्थावां में जीतेंद्र कुमार की लोकप्रियता का प्रमुख कारण उनका जमीन से जुड़ा व्यवहार और क्षेत्र में निरंतर सक्रियता है. उनके पिता अयोध्या प्रसाद भी कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं, जिससे यह सीट एक राजनीतिक विरासत का केंद्र भी बन चुकी है.

Asthawan Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार के नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के डॉ. जीतेंद्र कुमार ने पिछले तीन चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर यह सिद्ध कर दिया है कि यह क्षेत्र अब जदयू का गढ़ बन चुका है. कुर्मी बहुल इस क्षेत्र में जातीय समीकरणों, विकास कार्यों और व्यक्तिगत जनसंपर्क के बल पर डॉ. कुमार ने न सिर्फ 2010, 2015 और 2020 में जीत हासिल की, बल्कि हर बार अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हजारों वोटों से मात दी. 

हर बार 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराया  

2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अनिल कुमार को लगभग 11,600 वोटों से हराया. इससे पहले 2015 में वे लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के छोटेलाल यादव पर करीब 10,444 वोटों से और 2010 में कपिलदेव प्रसाद सिंह पर लगभग 19,570 वोटों से विजयी हुए थे.

सारांश तालिका

चुनाव वर्षविजेता (पार्टी)वोट्सप्रमुख प्रतिद्वंद्वी (पार्टी)वोट्सअंतर
2020जीतेंद्र कुमार (जदयू)51,525अनिल कुमार (RJD)39,925~11,600
2015जीतेंद्र कुमार (जदयू)58,908छोटेलाल यादव (LJP)48,464~10,444
2010जीतेंद्र कुमार (जदयू)54,176कपिलदेव प्रसाद सिंह (LJP)34,606~19,570

कुर्मी और दलित मतदाता निभाते हैं अहम रोल 

अस्थावां में कुल मतदाताओं की संख्या 2020 में लगभग 2.91 लाख थी, जो 2024 तक बढ़कर 3 लाख से अधिक हो गई है. यहाँ की आबादी में अनुसूचित जाति के साथ-साथ कुर्मी समाज की बड़ी हिस्सेदारी है, जो लंबे समय से जदयू के साथ जुड़ा रहा है. मुस्लिम वोटर भी लगभग 5% हैं, लेकिन निर्णायक भूमिका कुर्मी और दलित मतदाता निभाते रहे हैं. 

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लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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