Arwal Vidhan Sabha: भाजपा की नजरें अरवल पर टिकीं, 2025 में कठिन चुनौती, जातीय संघर्ष का रहा है इतिहास

Arwal Vidhan Sabha: अरवल, बिहार का एक छोटा लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील जिला है. यह जिला नक्सलवाद, जातीय संघर्ष और सामाजिक असमानता की पृष्ठभूमि से निकलकर आज महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधी टक्कर का मैदान बन चुका है.

Arwal Vidhan Sabha: बिहार का अरवल एक प्रशासनिक जिला है. इसकी स्थापना अगस्त 2001 में जहानाबाद जिले से अलग होकर की गई थी. यह राज्य के सबसे कम आबादी वाले जिलों में तीसरे स्थान पर आता है. कभी रेड कॉरिडोर का हिस्सा रहे इस क्षेत्र ने सामाजिक और राजनीतिक अशांति के कई भयावह दौर देखे हैं.

इतिहास

भूमि विवादों और जातीय संघर्षों ने अरवल की पहचान को लंबे समय तक प्रभावित किया. 1992 का बारा नरसंहार और 1999 का सेनारी नरसंहार, जिनमें भूमिहार समुदाय के दर्जनों लोग मारे गए. जवाब में, भूमिहारों द्वारा रणवीर सेना नामक सशस्त्र संगठन का गठन किया गया, जिसने 1997 में लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार जैसी हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया. इन घटनाओं ने अरवल को नक्सल प्रभाव वाले इलाके में प्रसिद्द कर दिया.

सीट का इतिहास

1951 में स्थापित अरवल विधानसभा सीट, जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यहां की राजनीति हमेशा परिवर्तनशील रही है. पिछले चार विधानसभा चुनावों में चार अलग-अलग दलों ने जीत दर्ज की है. सबसे लगातार जीत निर्दलीय कृष्णानंदन प्रसाद सिंह ने 1980 से 1990 तक तीन बार हासिल की. 2020 के विधानसभा चुनाव में, भाकपा (माले) (लिबरेशन) के उम्मीदवार ने भाजपा को लगभग 19950 मतों से हराया. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी राजद को अरवल में 15730 वोटों की बढ़त मिली, जिससे स्पष्ट होता है कि एनडीए के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.

जातीय समीकरण

इस सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाता 21.23% और मुस्लिम मतदाता 9.4% हैं. 2020 में 2.58 लाख पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 तक बढ़कर 2.69 लाख हो गए हैं. अरवल की राजनीति सामाजिक संघर्षों से उभरकर गठबंधन राजनीति और मतदाता जागरूकता की ओर बढ़ रही है.

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लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.