एक ही कार अलग-अलग राज्यों में अलग कीमत पर क्यों मिलती है? जानें वजह

Car Prices Variation: एक ही कार की कीमत हर शहर में अलग दिखती है क्योंकि असली खेल एक्स-शोरूम नहीं, ऑन-रोड प्राइस का होता है. अलग-अलग राज्यों के टैक्स, RTO चार्ज और लोकल फीस मिलकर कीमत बदल देते हैं. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

Car Prices Variation: भारत में कार खरीदने का प्लान बना रहे कई लोग एक बात देखकर हैरान हो जाते हैं. वही कार, वही मॉडल, लेकिन कीमत हर शहर में अलग-अलग. कभी ऑनलाइन चेक करो तो अलग रेट, और शोरूम जाओ तो कुछ और ही कीमत सुनने को मिलती है. पहली बार कार खरीदने वालों के लिए ये काफी कन्फ्यूजिंग हो जाता है. आखिर जब गाड़ी एक ही है, तो शहर बदलते ही उसकी कीमत क्यों बदल जाती है? आइए इस सवाल का जवाब आपको डिटेल में देते हैं.

क्यों बढ़ जाती है कार की असली कीमत?

सबसे पहले जो कीमत आपके सामने आती है, उसे एक्स-शोरूम प्राइस (ex-showroom price) कहा जाता है. यह कीमत कंपनी तय करती है और आमतौर पर पूरे भारत में लगभग एक जैसी होती है. लेकिन असल में आप सिर्फ इतनी रकम देकर कार घर नहीं ले जा सकते. क्योंकि जब आप कार खरीदने जाते हैं, तो इसमें कई और चार्जेज जुड़ जाते हैं. इन्हीं एक्स्ट्रा खर्चों को मिलाकर जो कुल रकम बनती है, उसे ऑन-रोड प्राइस (on-road price) कहते हैं. और यही वो असली कीमत होती है, जो आपको आखिर में चुकानी पड़ती है.

कौन-कौन से चार्जेज होते हैं? 

ऑन-रोड प्राइस में रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस, इन्शुरन्स और कभी-कभी TCS (Tax Collected at Source) जैसे चार्जेज जुड़े होते हैं. रजिस्ट्रेशन का काम हर राज्य का RTO (Regional Transport Office) करता है. यही वजह है कि ये चार्जेज शहर या राज्य के हिसाब से बदलते रहते हैं. इसीलिए, एक ही कार की कीमत अलग-अलग शहरों में थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है.

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस डालती हैं कीमत पर बड़ा असर

कार की कीमत अलग-अलग राज्यों में अलग होने का सबसे बड़ा कारण होता है रोड टैक्स. भारत में हर राज्य सरकार खुद तय करती है कि रोड टैक्स कितना लगेगा. यही वजह है कि कहीं यह टैक्स कार की कीमत का एक फिक्स परसेंट होता है, तो कहीं स्लैब सिस्टम लागू होता है. यानी जितनी महंगी कार, उतना ज्यादा टैक्स. और इसी फर्क की वजह से गाड़ी की ऑन-रोड कीमत में बड़ा बदलाव आ जाता है.

सिर्फ रोड के अलावा रजिस्ट्रेशन फीस भी आपकी जेब पर असर डालती है. यह फीस हर राज्य के RTO (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) द्वारा ली जाती है. इसके नियम भी जगह के हिसाब से बदलते रहते हैं. कुछ राज्यों में तो इसके साथ अलग से लोकल चार्जेस भी जोड़ दिए जाते हैं. यही कारण है कि किसी गाड़ी को रजिस्टर कराने की कुल लागत हर जगह एक जैसी नहीं होती.

यह भी पढ़ें: 1,948cc का इंजन, कीमत सिर्फ ₹5 लाख, क्या आपको पता है भारत की पहली SUV कार का नाम?

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >