आपने अक्सर रास्ते में SUVs और कुछ महंगी गाड़ियों के पीछे 4×4 लिखा देखा होगा. देखते ही कई लोग सोच में पड़ जाते हैं कि इसमें न तो 16 सीटें हैं और न ही 16 पहिये, तो फिर ये 4×4 क्यों लिखा होता है. महिंद्रा की ऑफ-रोडर थार में भी यह नंबर आपको दिखाई देगा. अक्सर तो खुद गाड़ी चलाने वाले लोग भी इसके असली मतलब से अनजान रहते हैं. अब ऐसे में सवाल यह है कि आखिर 4×4 का मतलब क्या है और और यह गाड़ियों में क्यों लगाया जाता है. आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं.
क्या होता है 4×4 का मतलब?
अगर आपने कभी किसी कार पर 4×4 लिखा देखा हो और सोचा हो कि इसका मतलब चार पहिए और चार सीटें हैं, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह नंबर कार के ड्राइव सिस्टम यानी इंजन से जुड़ा होता है. छोटी कारें जैसे वैगनआर, ऑल्टो या नेक्सॉन और ब्रेजा में आमतौर पर 4×2 सिस्टम ही मिलता है. इसका मतलब यह है कि ये कारें 2-व्हील ड्राइव सिस्टम को सपोर्ट करती हैं. यानी इनका इंजन केवल दो पहियों को ही पॉवर भेजता है.
वहीं अगर किसी कार पर 4×4 लिखा हुआ है, तो समझ लीजिए कि वह कार 4-व्हील ड्राइव कैपेसिटी के साथ आती है. आसान शब्दों में कहें तो इंजन की पावर सिर्फ आगे या पीछे के पहियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समान रूप से चारों पहियों तक जाती है. 4×4 ड्राइव सिस्टम आमतौर पर बड़ी और भारी गाड़ियों में देखा जाता है. ऑफ-रोडिंग के शौकीनों की पसंद, जैसे महिंद्रा थार या जीप, में भी ये फीचर मिलता है.
4×4 का कार में क्या काम होता है?
अगर आप पहाड़ी रास्तों या खुरदुरे रास्तों पर गाड़ी चलाने का एक्सपीरियंस रखते हैं, तो आपने देखा होगा कि छोटी कारें अक्सर अटक जाती हैं, जबकि महिंद्रा थार या जीप जैसी SUV आसानी से आगे बढ़ जाती हैं. इसका राज है उनका 4×4 ड्राइव सिस्टम. इसमें सिर्फ पीछे के पहिए ही नहीं, बल्कि आगे के पहिए भी घूमते हैं. इससे गाड़ी को एक्स्ट्रा पावर मिलती है और ड्राइविंग आसान हो जाती है. इस सिस्टम की वजह से खराब रास्तों या ढलानों पर गाड़ी का कंट्रोल बेहतर रहता है.
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