ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो भरना होगा जुर्माना, जानें कैसे करें आवेदन

गाड़ी चलाने वाले हर व्यक्ति के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनाना बेहद जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाता है, तो उसे जुर्माना या जेल या फिर दोनों प्रकार की सजा दी जा सकती है.

Driving License Apply: अगर आप सड़क पर गाड़ी लेकर निकल रहे हैं, तो क्या आपको पता है कि आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है? नहीं पता है, तो जान लीजिए. बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के आप सड़क पर गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए, तो आपको भारी-भरकम जुर्माना देना होगा और जुर्माना नहीं देने के बदले तीन महीने की जेल भी हो सकती है. एक बार जुर्माने का भुगतान नहीं करने के बाद आप दोबारा फिर बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाएंगे, तो आपको जुर्माना देने के साथ-साथ तीन महीने की जेल भी हो सकती है. बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 207 (1) के तहत आपकी गाड़ी को जब्त भी किया जा सकता है. इसके अलावा, आपको करीब 5,000 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल या फिर दोनों प्रकार के दंड दिए जा सकते हैं. बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने से बेहतर इसे बना लेना है. आइए, जानते हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस की क्या है प्रक्रिया…

कितने प्रकार के होते हैं ड्राइविंग लाइसेंस


अगर आप अपने लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जा रहे हैं, तो आपको यह भी जान लेना चाहिए कि ड्राइविंग लाइसेंस कितने प्रकार के होते हैं. बता दें कि ड्राइविंग लाइसेंस दो प्रकार के होते हैं. इनमें लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस या लर्निंग लाइसेंस और परमानेंट या पक्का ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं. लर्निंग लाइसेंस उन वाहन चालकों को दिया जाता है, जो गाड़ी चलाने के लिए सीखते हैं. मोटर ट्रेनिंग स्कूल से गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग लेने के बाद वाहन चालकों को परिवहन विभाग की ओर से सबसे पहले लर्निंग लाइसेंस दिया जाता है. इसकी वैधता अवधि 180 दिन या 6 महीने होती है. वहीं, वाहन चालकों को परिवहन विभाग की ओर से लर्निंग लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने के बाद परमानेंट या पक्का लाइसेंस दिया जाता है. इसका अर्थ यह होता कि 6 महीने तक सड़कों पर गाड़ी चलाने के बाद आप पक्के ड्राइवर हो गए हैं, इसलिए अब आपको परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस दे दिया जाना चाहिए.

लर्निंग लाइसेंस के लिए कैसे करें आवेदन

  • लर्निंग लाइसेंस बनाने के लिए सबसे पहले आपको परिवहन सारथी पोर्टल पर विजिट करना होगा.
  • इसके बाद आपको अपना राज्य सलेक्ट करना होगा.
  • अब आप ‘न्यू लर्नर लाइसेंस ‘ पर क्लिक करें. इसके बाद नया पेज खुलेगा.
  • यहां अपने बारे में निजी जानकारी, अपना पता, फोन नंबर आदि का ब्योरा दर्ज करें.
  • इसके बाद फिर फोटो और साइन की स्कैन्ड कॉपी अपलोड करना होगा.
  • इसके बाद टेस्ट के लिए तारीख सलेक्ट करना होगा.
  • सबसे आखिर में आपको लर्निंग लाइसेंस की फीस जमा करनी होगी.
  • लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद आपको निर्धारित तिथि को आरटीओ जाना होगा.
  • आरटीओ में परिवहन इंस्पेक्टर के पास टेस्ट पास होने के बाद आपके लिए लर्निंग लाइसेंस जारी किया जाएगा.
  • आप चाहें तो इसे ऑनलाइन डाउनलोड भी कर सकते हैं.

पक्का ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कैसे आवेदन करें?

  • लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनने के 30-180 दिन के भीतर आप परमानेंट या पक्का ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं.
  • पक्का ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए आपको परिवहन सारथी पोर्टल पर विजिट करना होगा, जैसे लर्निंग लाइसेंस बनाने के लिए किया था.
  • इसके बाद सारथी पोर्टल पर लॉगइन करने के बाद न्यू ड्राइविंग लाइसेंस पर क्लिक करें.
  • अब एक नया पेज खुलेगा.
  • यहां अपनी डिटेल्स भरें और टेस्ट के लिए तारीख का चयन करके फीस जमा करें.
  • फिर चुनी गई तारीख पर आरटीओ जाकर पक्का ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए दोबारा टेस्ट देना होगा.
  • टेस्ट पास होने पर पर आपका पक्का ड्राइविंग लाइसेंस आपके द्वारा दिए गए घर के पते पर आ जाएगा.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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