साल में एक बार आदिवासी और मूलवासी सेंदरा पर्व के तहत जंगली जानवरों का शिकार करते हैं. सरकार ने उप वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक का एक, सहायक वन संरक्षक का एक, रेंजर का एक, फारेस्टर का 6 एवं फारेस्ट गार्ड के 27 पद स्वीकृत किए हैं.यहां स्थायी तौर पर महज एक रेंजर, 2 फारेस्टर एवं एक फारेस्ट गार्ड कार्यरत हैं.
शिकार व पेड़ों की कटाई से कई जानवर-पक्षी विलुप्त
जमशेदपुर : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में लगातार हो रहे शिकार और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का जंगल पर गहरा असर पड़ा है. तेंदुआ समेत कई जानवर और पक्षी विलुप्त हो चुके हैं. विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए सरकार के पास ठोस रणनीति नहीं है. चार लोगों के भरोसे दस हजार जंगली जानवर […]

जमशेदपुर : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में लगातार हो रहे शिकार और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का जंगल पर गहरा असर पड़ा है. तेंदुआ समेत कई जानवर और पक्षी विलुप्त हो चुके हैं. विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए सरकार के पास ठोस रणनीति नहीं है.
चार लोगों के भरोसे दस हजार जंगली जानवर
इस आश्रयणी के 10 हजार से अधिक जंगली जीव जंतुओं (अनुमानित) के संरक्षण की जिम्मेवारी सिर्फ चार लोगों पर है.
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के रेंजर आरपी सिंह, दो फारेस्टर प्रताप चंद्र, तपन कुमार महतो और फाॅरेस्ट गार्ड कोलेश्वर भगत ही जंगल और जंगली जानवरों की सुरक्षा संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं.चांडिल, नीमडीह, बोड़ाम, पटमदा, जमशेदपुर और घाटशिला प्रखंड में दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी फैला हुआ है. पिंडराबेड़ा और मकुलाकोचा में वन विश्रामागार है.
जानवरों की स्थिति एक नजर में
वर्ष हाथी भालू सुअर कोटरा हिरण लंगूर बंदर जंगली कुत्ता तेंदुआ रेटल लाल गिलहरी वन मुर्गी लकड़बग्घा नेवला धनेश मयुर खरहा सांप लोमड़ी
2008 80 36 204 29 31 639 1 1 1 56 269 9 19 2 71 0 3 0
2009 90 22 229 70 26 832 16 0 0 84 246 0 50 0 50 1 31
2010 45 (इसमें सिर्फ हाथियों की ही गणना हुई थी)
2011 127 17 190 36 9 710 6 0 0 69 187 20 35 3 73 11 2 5
2012 156 42 216 137 11 1015 0 0 0 148 567 5 39 0 112 0 0 27
नोट : 2004 से लेकर 2007 और 2012 के बाद से अब तक कोई गणना ही नहीं हुई है