पटना : भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के उस कथन कि बिहार आतंकवादियों को छिपने के लिए स्वर्गभूमि लगने लगी है, इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि कुछ लोग अपनी सोच के अनुसार सभी चीजों को सांप्रदायिक चश्मे से देखते हैं. पथ निर्माण विभाग के एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद आज पत्रकारों से नीतीश ने कहा कि कोई भी आतंकी घटना चिंता का विषय है. लेकिन ऐसी एक या दो घटना के आधार पर बिहार को आतंकियों के लिए स्वर्गभूमि बता दिया जाता है, जबकि गुजरात और देश के अन्य भागों में ऐसी कई घटनाएं घटी हैं तो उनके बारे में क्या राय कायम की जाए.
उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी सोच के अनुसार सभी चीजों को सांप्रदायिक चश्मे से देखते हैं. सभी जानते हैं कि पटना में संपन्न भाजपा की रैली के दौरान हुए सिलसिलेवार धमाकों से किसे लाभ हुआ. अगर यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं घटी होती तो उक्त रैली फ्लाप थी और उसे मीडिया का उतना कवरेज भी नहीं मिलता. नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले वर्ष जुलाई में बोधगया में और 27 अक्तूबर को पटना में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं की पूर्नावृति नहीं हो. इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं, पर अब जबकि चुनाव का समय नजदीक है. ऐसे में आतंकवाद के नाम पर राजनीति करना शर्मनाक है.
उल्लेखनीय है कि कल मुजफ्फरपुर में आयोजित भाजपा की हुंकार रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था कि नेपाल की खुली सीमा आज संकट का कारण बनी हुई है और आतंकवादियों को छिपने के लिए बिहार उनको स्वर्गभूमि लगने लगी है क्योंकि बिहार की वर्तमान सरकार की वोटबैंक की राजनीति आतंकवादियों के प्रति कठोर रवैया बरतने के लिए तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा कि आतंकवादी के प्रति यह नरमी पूरे देश को तबाह कर देगी और उसके खिलाफ राजनीतिक विचाराधारा और सत्ता सुख आडे नहीं आने चाहिए. आतंकवाद के खिलाफ लडने के लिए देश का एक स्वर और संकल्प होना चाहिए और राजनीति से उपर उठकर होना चाहिए तभी आतंकवाद के खिलाफ लडाई लडी जा सकती है और सामान्य नागरिक को सुरक्षा का एहसास हो सकता है.तीसरे मोर्चे के गठन पर मोदी की टिप्पणी पर नीतीश ने कहा दरअसल तकलीफ उसी को लेकर है क्योंकि इस फ्रंट के गठन ने उनके सत्ता में आने के खेल को बिगाड दिया है. मोदी द्वारा उन पर पाखंड करने का आरोप लगाए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि यह उन्हीं पर ज्यादा फिट बैठता है.
नीतीश ने कहा कि वे नहीं बल्कि उनके जैसे लोग ही कोई मौका नहीं गंवाते चाहे वह किसी मरने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने का मौका हो या जैसा उन्होंने कोसी त्रसदी के लिए भेजी गयी राहत राशि को लेकर पूरे पेज का अखबार में विज्ञापन निकाला था. बिहार में शौचालय, बिजली, रोजगार और चीनी मिलों की स्थिति को लेकर मोदी द्वारा पेश किए गए आंकडों पर हंसते हुए नीतीश ने उसे गलत बताते हुए कहा कि बिहार के शहरी इलाके में 64 प्रतिशत तथा ग्रामीण इलाकों में करीब 28 प्रतिशत घरों शौचालय उपलब्ध है.
नीतीश ने कहा कि केंद्र द्वारा केवल बीपीएल परिवारों के लिए शौचालय निर्माण की योजना चलायी जा रही थी। बिहार देश का ऐसा पहला राज्य है जहां बीपीएल परिवारों के अलावा एपीएल परिवारों के लिए लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व से विकसित और तटीय राज्यों की तुलना बिहार जैसे विकासशील राज्यों से तुलना किया जाना उचित नहीं है.
नीतीश ने गुजरात और वहां सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि सभी उनके विकास की सच्चाई को जानते हैं वह आंकडों का खेल है, क्योंकि बडी आबादी अभी भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन तथा कुपोषण के शिकार हैं. मोदी के बिहार में चीनी मिलों की खस्ता हाल के लिए प्रदेश की वर्तमान सरकार को जिम्मेदार ठहराने को नकारते हुए नीतीश ने कहा कि यह उनके ज्ञानवर्धन के लिए है कि उनके कार्यकाल के दौरान बिहार में पूर्व से बंद पडी चीनी मिलों को खोला गया है और अब उनका विस्तार हुआ है.
मोदी के बिहार में केवल 16 प्रतिशत घरों में बिजली उपलब्ध होने के बारे में नीतीश ने कहा कि इसे प्रदेश की जनता से स्वयं खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब वे सत्ता में आए तो जीरो मेगावाट से अपनी शुरुआत की थी और आज स्थिति यह है कि जिन इलाकों में तार और पोल हैं वहां 16 से 24 घंटे बिजली मिल रही है.
