झारखंड की राजधानी रांची में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है. ‘महामृत्युंजय नाथ’ के रूप में भगवान भोलेनाथ रांची के ओयना ग्राम में विराजमान हैं.
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इस दुर्लभ शिवलिंग की लंबाई 6 फुट 11 इंच और वजन 1,500 किलोग्राम है. इस प्रकार का सबसे बड़ा शिवलिंग मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में है.
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रांची के जाने-माने पंडित रामदेव पांडेय की कठोर परिश्रम के बाद बाबा महामृत्युंजय नाथ रांची पहुंचे. उज्जैन में नर्मदेश्वर शिवलिंग पाये जाते हैं.
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धार्मिक मान्यता है कि नर्मदा नदी भगवान शिव की पुत्री हैं. शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि ओंकारेश्वर-मल्लेश्वर और ओंकारेश्वर क्षेत्र के विशेष भाग में शिवलिंग की आकृति के पत्थर मिलेंगे.
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इस शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती. शिवलिंग बिना प्राण-प्रतिष्ठा के ही पूजे जाते हैं और इसकी पूजा करने वालों को इच्छित फल देते हैं.
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जिस तरह गोमती नदी में मिले पत्थर भगवान विष्णु के प्रतीक शालीग्राम माने जाते हैं, उसी प्रकार नर्मदा नदी से मिलने वाले शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहा जाता है. माना जाता है कि नर्मदेश्वर शिवलिंग तिल-तिल बढ़ता है.
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15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन रांची के नर्मदेश्वर शिवलिंग को अद्भुत ढंग से सजाया गया था.
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रांची में है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नर्मदेश्वर शिवलिंग, जानें महामृत्युंजय नाथ के झारखंड आने की पूरी कहानी
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