रविवार

Ravivar Mag

परदे के पीछे की आवाज का रोमांच

उर्मिला मातोंडकर का नाम लेते ही में ‘रंगीला’ की मिली, ‘सत्या’ की विद्या और ‘पिंजर’ की पूरो सोच में दाखिल हो जाती है. ऐसे कामयाब किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सिनेमायी परदे से फिलहाल दूर है. उन्होंने बच्चों की फिल्म ‘दिल्ली सफारी’ के जरिए वापसी की है लेकिन परदे के पीछे से. यहां उर्मिला मातोंडकर अपनी आवाज के साथ फिल्म का हिस्सा बनी हैं. पेश है अनुप्रिया से हुई उनकी बातचीत के मुख्य अंश

मैं आनंद जैसी दुनिया चाहता हूं

कुछ फिल्में एक याद की तरह जिंदगी में रह जाती हैं. यह याद गुजरते वक्त के साथ भी धुंधली नहीं पड़ती.उसके संवाद, दृश्य और किरदार एक हल्की सी आहट पाकर सामने आ खड़े होते हैं. किसी एक फिल्म से जुड़ी ऐसी ही यादों को साझा करेगा यह स्तंभ.

..अब चिट्ठियां न बांटे कोई

इसी महीने देश में पोस्टल वीक मनाया गया. बात जब भारतीय डाक की निकली तो याद आये वे खत, जो न जाने कब हमारे जीवन से गायब हो गये और हमें इसका अहसास भी नहीं हुआ. कभी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहीं चिट्ठियां हमारे मोबाइल फोन के छोटे से इनबॉक्स में समा गयीं, और न जाने कितनी बार गुम हुईं.

सिनेमा की वह शबनम..

फिर तेरा वक्त-ए-सफर याद आया. मिर्जा गालिब के इस मिसरे की तर्ज पर हम हर हफ्ते एक ऐसी शख्सीयत से आपको मिलवाते हैं, बीते कल में जिनकी कामयाबी के चर्चे थे, पर आज कभी-कभार ही उनकी बात कहीं होती है. मिलिये इस बार बिंदु से..

इ-मेल के युग में अब पत्र सुनहरी यादों वाला कल

सुभाष अग्रवाल, संपादक के नाम पत्र लिख कर गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके हैं.

एक अखिलदेशीय लेखक का प्रस्थान

श्रद्धांजलि

मंत्रलय

कहानी

काश! दिल्ली दूर न होती

मनोज मोहन

कर्मो की श्रृंखला है हमारा जीवन

जे कृष्णमूर्ति

त्योहारों के बीच, गाड़ियों का सिक्सर

टॉप गियर