रि-व्‍यू

Reviews, Book Review, Analysis etc.

हमेशा कंप्लेन न करें, जो है उसका तो बेस्ट यूज करें

ऑफ़िस में नया सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हुआ, तो दो तरह की प्रतिक्रियाएं आयीं. क्या जरूरत थी इस तरह के सॉफ्टवेयर की, इससे तो काम और भी खराब होगा. कंप्यूटर सपोर्ट नहीं कर रहा है..दूसरी प्रतिक्रिया, काम में तो दिक्कत हो रही है, लेकिन इसमें जितनी फ़ैसिलिटी है, उसके लिहाज से यह काफ़ी काम का साबित होगा..कहने का मतलब यह कि जिन्हें जिंदगी में बहुत कुछ करना है, वे कभी संसाधनों और सिस्टम का रोना नहीं रोते, वे अपना काम करते हैं.

असफ़लता की निराशा में भी अवसरों पर नजर रखें

सुबह ऑफ़िस में कदम रखते ही रजनीश को बॉस की डांट का सामना करना पड़ा. उसके चेहरे को देख कर साफ़ लग रहा था कि आज डांट ज्यादा पड़ी है. बगल में आकर बैठा तो मैंने पूछ लिया कि आज डांट ज्यादा पड़ी है क्या? उसने कहा- आते ही बॉस ने लेक्चर पिला दिया.

नये के फ़ेर में पुराने को उपेक्षित न करें

बात चाहे नये नियुक्त होनेवाले मैनपावर की हो या फ़िर नये सॉफ्टवेयर या सिस्टम की. अक्सर लोग नये के आने के बाद पुराने को उपेक्षित करना शुरू कर देते हैं. ऐसा करना सही नहीं है. सभी की अपनी उपयोगिता है.

समस्या का हल ढूंढ़ें हथियार न डालें

जिंदगी में कई बार ऐसा महसूस होता है कि सारे रास्ते बंद हो गये हैं. लोग खुद को हालात के भरोसे छोड़ देते हैं. तनाव का बोझ प्रयास करने से रोकता है, नतीजा चीजें जो हमारे पक्ष में आ सकती थीं, वह और भी खराब हो जाती हैं.

दुनिया में हर नयी चीज दो बार बनती है

सपने दो तरह के होते हैं. एक सपना जो हमें बंद आंखो में दिखाई देता है और दूसरा जो हम खुली आंखों से देखते हैं. जो सपने हकीकत में या कहें खुली आंखों में बसाये जाते हैं, उनको पूरा कर पाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना बहुत जरूरी है.

निराशा के समय भी प्रयास नहीं छोड़ें

कई बार ऐसा होता है कि चीजें हमारे वश में नहीं होतीं. हम चाह कर भी उसे टाल नहीं सकते. ऐसा भी नहीं है कि कुछ नहीं कर सकते, लेकिन समस्या यह है कि जो करना चाहिए, वह करते नहीं और जो नहीं करना चाहिए, वही कर देते हैं.

सफ़लता के लिए न घबराएं न हड़बड़ाएं

आजकल के ज्यादातर युवा जिंदगी में हर कुछ बहुत जल्दी पा लेना चाहते हैं और इसके लिए वह अतिरिक्त मेहनत भी करते हैं. वहीं कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो पाना तो हर कुछ चाहते हैं और वह भी समय से पहले, लेकिन मेहनत करने के नाम से दूर भागते हैं.

अपने वर्तमान काम से संतुष्ट रहना सीखें

लगभग डेढ़ दशक पुरानी बात है. मैं उस समय दिल्ली में नौकरी कर रहा था. हमारी कंपनी में एक लड़का रजनीश आया. उसकी बहाली जूनियर पोस्ट पर हुई थी. वह अपने काम से खुश नहीं रहता था और हमेशा यही कहता कि काश! अगर मेरा प्रमोशन हो जाता, तो लाइफ़ सेट हो जाती.

बार-बार देखें अपने सपनों के साकार होने का सपना

सपने तो हमारे बड़े ही होते हैं. कल्पनाएं तो हम अक्सर वास्तविकता के धरातल से ऊपर उठ कर भी करते हैं, लेकिन उन सपनों को, अपनी कल्पनाओं को जिंदा रखना उतना ही जरूरी है, जितना कि सपने देखना.

इतने सज्जन न बनें कि सारा बोझ आप पर आ जाये

अब इसका मतलब यह भी नहीं कि आप एग्रेसिव हो जायें. घर-परिवार की बात हो या कैरियर की, संतुलन हर जगह जरूरी है. रजनीश ने जब नया-नया ऑफ़िस ज्वाइन किया, तो उसके बॉस ने उसपर काम का इतना बोझ दे दिया कि उसे न चाहते हुए भी अपना ऑफ़ कैंसिल करना पड़ता, देर रात तक रुक कर काम करना पड़ता. बाकी सभी कर्मचारी समय पर घर चले जाते थे, लेकिन रजनीश को काम के कारण रुकना ही पड़ता था. घर में भी पत्नी उसे हमेशा ताने देती थी कि एक तुम ही हो ऑफ़िस में काम करनेवाले.