।। कुमार विश्वास ।।
(सदस्य, टीम अन्ना)
आंदोलन शुरू होने के बाद से ही केंद्र सरकार ने टीम अन्ना पर तरह-तरह के आरोप लगाये. खुद अन्ना हजारे के अलावा टीम के ऐसे कई सदस्य हैं, मसलन शांति भूषण, प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और खुद मैं, जिन्हें किसी न किसी आरोप के जरिये निशाना बनाने की कोशिश की गयी.
हालांकि, इन आरोपों से हमारा आंदोलन कमजोर होने के बजाय और भी मजबूत होता गया. लेकिन जिस तरह का आरोप मुफ्ती शमीम काजमी पर लगा है और उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा है, वह निश्चित रूप से शर्मनाक है. इससे हमारे आंदोलन की बदनामी हुई है.
इतना ही नहीं, अपने गलत कार्यो की वजह से शर्मिदगी महसूस करने या फिर सदस्यों के सामने अपनी भूल स्वीकार करने के बजाय उन्होंने जिस तरह के आरोप लगाये हैं, उससे उनकी गलतियां और भी बढ़ जाती हैं.
कोर कमिटी की पिछली तीन-चार बैठकों से ऐसा लग रहा था, कि हमारी बैठकों की बातें मीडिया तक पहुंच रही हैं. इसके बावजूद हमने अपने किसी सदस्य पर किसी भी तरह का शक नहीं किया. होना भी नहीं चाहिए.
लेकिन पिछले दिनों हुई कोर कमिटी की बैठक में कमिटी के सदस्य गोपाल राय, जो कि शारीरिक परेशानियों के वजह से अन्य सदस्यों की भांति जमीन पर न बैठकर कुर्सी पर बैठा करते हैं, ने काजमी को मोबाइल से रिकॉर्डिग करते देखा, तो उनसे मोबाइल देखने मांगा. काजमी ने इस तर्क की जगह कि मोबाइल में परिवार की निजी तसवीर है, बहाना बनाया कि मुङो तो रिकार्डिग करने आता ही नहीं, बटन दब गया होगा.
टीम के अन्य सदस्यों को उनके इस व्यवहार पर शक हुआ. सदस्यों के बार-बार आग्रह करने पर उन्होंने मोबाइल दिया. उनके मोबाइल में एक घंटे से ज्यादा के तीन ऑडियो रिकॉर्डिग पाये गये. सदस्यों ने जानना चाहा कि आखिर वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया.
सही कारण बताने के बजाय वे बैठक से बाहर जाने लगे. वरिष्ठ सदस्यों ने उनसे अपनी गलती स्वीकार करने की बात भी कही, क्योंकि हम इस मसले को ज्यादा तूल देने के बजाय उनकी मंशा जानना चाहते थे.
अगर काजमी साहब ने सही मंशा बता दी होती, या फिर बैठक में शामिल होने के पहले ही कह दिया होता कि वे आज की बैठक की रिकॉर्डिग करना चाहते हैं, तो आपत्ति जैसी कोई बात नहीं थी, क्योंकि आंदोलन के दौरान सिविल सोसाइटी और सरकार के प्रतिनिधि जब बैठक कर रहे थे, तब खुद टीम अन्ना ने बैठकों की रिकॉर्डिग करने और उसे जनता के सामने लाने की बात कही थी. सैद्धांतिक रूप से हम अब भी इसके पक्षधर हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि काजमी साहब ने अपनी गलती स्वीकार करने की बजाय जिस तरह के आरोप लगाये, वह बिल्कुल ही बेबुनियाद है. उन्होंने कहा कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है, वह भी इसलिए कि वे टीम अन्ना की कोर कमिटी में एकमात्र मुसलिम सदस्य हैं और अन्य सदस्य नहीं चाहते कि इसमें मुसलिम रहें.
उनके इस बेबुनियाद आरोप का जवाब इस बात से मिल जाता है कि शाजिया इल्मी मुसलिम समुदाय से हैं और कोर कमिटी में बनी हुई हैं.
दरअसल, इस देश में एक परंपरा हो गयी है कि जब भी आप पर कोई आरोप लगता है, या फिर चीजें आपके मनमुताबिक नहीं होती हैं, तो लोग इसे धर्म से जोड़ देते हैं. स्वामी अग्निवेश गलत करते पकड़े गये और उन्हें टीम से बाहर किया गया. वे तो भगवा पहनते हैं, वे भी आरोप लगा सकते थे कि हिंदुओं की भावना का सम्मान नहीं किया जा रहा है, इसलिए उन्हें टीम से निकाला गया है.
काजमी साहब ने यह भी आरोप लगाया है कि टीम में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे हैं और टीम का राजनीतिकरण कर दिया गया है. ये सब बातें बेबुनियाद हैं. अगर उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया गया है, या फिर टीम का राजनीतिकरण किया गया है, तो उन्हें इसकी लिखित शिकायत करनी चाहिए थी.
सच्चई यही है कि उन्होंने हमारे विश्वास को तोड़ा है. इसके बाद हमें और सचेत रहना होगा. किसी भी लड़ाई या सामाजिक आंदोलन में ऐसे भेदिया छोड़ने या षड्यंत्र रचने की कोशिश होती है.
कुछ लोग ऐसे प्रलोभन में आ भी जाते हैं, लेकिन इन प्रलोभनों को दरकिनार कर जो आंदोलन में सर्वस्व न्योछावर करता है, वही तपता सोना है. काजमी साहब को किस तरह का प्रलोभन था यह तो जांच का विषय है, लेकिन ऐसे षड्यंत्रों से साफ है कि आंदोलन सही दिशा में जा रहा है और हम अपने लक्ष्य में कामयाब होंगे.
(बातचीत : संतोष कुमार सिंह)
you said that movement is going on right way.but it is not clear that why did you went with Baba Ramdeo and later declared that both movement will go separate??
there was nothing wrong if Kazami recorded audio,because you demanded recording when meeting was held with govt.members.
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