देहसुख में डूबता देश

प्रेम और देह व्यापार अलग-अलग हैं. प्रेम या आत्मीय लगाव, सहज मानवीय घटना है. पर इंद्रियसुख का गुलाम बनना पतन का संकेत है. दुनिया में जासूसी के अनेक प्रकरण हैं, जहां सौंदर्य के बल मुल्कों की संवेदनशील सूचनाएं निकाल ली गयीं.

इसलिए आज भी अमेरिका या ब्रिटेन या पश्चिम के अन्य देशों में खुला माहौल है, सेक्स संबंधों में पूरब के देशों की तरह स्थिति नहीं है, फिर भी जब शासकवर्ग में किसी व्यक्ति के संबंध, शादी के दायरे से बाहर के उजागर होते हैं, तो तूफान खड़ा हो जाता है.

हुत पहले कहा गया कि कवि या साहित्यकार देश-दुनिया के भविष्य का आकार खींचते हैं. रूप देते हैं. इतिहास के गर्भ में बननेवाले देश, समाज की छवि को भविष्यद्रष्टा की तरह पहले देखते हैं. वे ही भावी समाज की रूपरेखा, नाक-नक्श या नक्शा भी खींचते हैं.

हालांकि निजी मान्यता है कि आज की दुनिया का भविष्य राजनीति ही तय कर रही है और बदलाव का मूल सूत्र, एकमात्र राजनीति ही हो सकती है. पर इस भारतीय राजनीति में जब अपने समय के बड़े सवाल नहीं उठें, समाज-परिवार-देश के नैतिक सवालों या असल चिंता-चुनौतियों पर गांव-गांव, गली-गली या सार्वजनिक चौराहों पर चर्चा न हो, अगर राजनीति अपने समय के बुनियादी सवालों को उठाये ही नहीं, तब क्या होगा? तब ऐसी राजनीति, देश के चौतरफा पतन का रास्ता आसान बनाती है, जो भारत में दिख रहा है.

आज की भारतीय राजनीति, सिर्फ और सिर्फ गद्दी पाने की चौहद्दी में सिमट गयी है. गद्दी भी किसलिए? धन-कमाने, रसूखदार बनने और अपनी भावी पीढ़ियों का भविष्य गढ़ने के लिए. पहले समाज के नैतिक और अहम सवाल, राजनीति में बहस के मुख्य एजेंडा होते थे.

मसलन जाति तोड़ो, जनेऊ तोड़ो, सतीप्रथा मिटाओ, औरत-पुरुष की बराबरी का मुद्दा या देह व्यापार खत्म करने के लिए सख्त व्यवस्था जैसी बातें. यानी राजनीति होती इसलिए थी कि वह समाज को लगातार आदर्श और श्रेष्ठ होने की ओर ले जाये.

पर आज सामाजिक बुराइयां, समाज या राजनीतिक मुख्यधारा के सवाल नहीं बनते? चीन की नयी व्यवस्था के तत्काल बाद, माओ ने देह व्यापार (प्रास्टिट्यूशन)और रखैलों की पुरानी परंपरा पर सख्त पाबंदी लगा दी. भारत की राजनीति में भी ऐसे नैतिक -सामाजिक प्रश्न या राजनीतिक मुद्दा ही सत्ता, राजनीति के मूल में होते थे. वे सवाल ही राजनीति का भविष्य या दशा-दिशा तय करते थे. पर आज भारत की राजनीति ऐसे सवालों पर चुप है. ऐसा ही एक गंभीर पर अचर्चित सवाल है, आज के भारतीय समाज का.

1991 के आर्थिक उदारीकरण ने देश को लाइसेंस, कोटा और परमिट राज से निकाल कर आर्थिक समृद्धि तो दी, पर नैतिक रूप से भारतीय देश-समाज की पुरानी आभा-तेज को निस्तेज भी किया है. भ्रष्टाचार और भोगवाद तो अनियंत्रित है ही. पर कालगर्ल रैकेट या देह व्यापार जिस तरह बढ़ा है, वह अविश्वसनीय है. यह रैकेट क्यों बढ़ा? समृद्धि के साथ भोग की भूख क्यों बढ़ी?

एक प्रमुख कारण तो उदारीकरण के बाद बढ़ता भोगवाद है. छक कर भोगो-मस्ती में जियो, नया दर्शन है. बिना श्रम किये, दुनिया की सारी दौलत, सुख, ऐशो-आराम कदम चूमे, यह ख्वाहिश है. यह बाजारवाद है. विनोबा जी ने कहा था, ऐसे हालात में मनुष्य इंद्रियजीवी बनता है. उसे इंद्रियसुख में ही स्वर्ग या मुक्ति दिखाई देती है.

बाजारवादी व्यवस्था, भी इस देह व्यापार के पीछे एक बड़ा कारण है. महत्वपूर्ण फैसलों को खरीदने या प्रभावित करने के लिए देहव्यापार या कालगर्ल रैकेट का विस्तार हुआ है. ब्लैकमेल से भी सरकारी फैसलों को खरीदने-प्रभावित करने की प्रवृत्ति से देह व्यापार का धंधा बढ़ा है.

उधर, भोगवाद में यह भी लक्षण है कि जब बेशुमार दौलत आ जाये, तो इंद्रियसुख ही जीवन का चरम लक्ष्य बन जाये. इन सभी कारणों से भारत के समृद्ध और शासक तबके में यह देह व्यापार बड़ा धंधा बन गया है.

भारत का शासकवर्ग भी इस चक्र में फंसा है. छोटे शहरों, मध्यवर्ग या मामूली लोगों के बीच कालगर्ल रैकेट पकड़ा जाना या देह व्यापार के मामले तो रोज मीडिया में छाये रहते हैं. बड़े शहरों से छोटे शहरों तक यह सामाजिक रोग पसर गया है. किसी भी समाज के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक, नैतिक सवाल है.

पर भारत के शासकवर्ग (इलीट या रूलिंग क्लास) के बीच यह सब जो हो रहा है, वह सवाल देश में क्यों नहीं उठ रहा? न राजनीति में इसकी चर्चा होती है, न विधायिका में सवाल उठते हैं. नौ अप्रैल को देश के मशहूर अखबार दक्कन हेराल्ड में छह कालम की एक बड़ी खबर छपी थी.

एक फिल्म नायिका की गिरफ्तारी से आंध्र प्रदेश के बड़े आला अफसरों-शासक-राजनेताओं और उद्योगपतियों के रंगीन किस्से उछले. हाल में, हैदराबाद में तारा चौधरी नाम की एक एक्ट्रेस (नायिका) की गिरफ्तारी हुई. उसके घर से पुलिस को भारी मात्र में वीडियो भंडार मिला.

फोटोग्राफ मिले. आडियो क्लिप्स मिले, जिनमें आंध्र के अनेक महत्वपूर्ण लोग हैं. इस पूर्व अभिनेत्री को पुलिस ने ‘प्रिवेंशन आफ इम्मारल ट्रैफिकिंग एक्ट’ के तहत गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार होते ही तारा चौधरी ने धमकी दी कि वह अनेक राजनेताओं, बड़े पुलिस अफसरों, आइएएस अफसरों और उद्योगपतियों का सच जाहिर कर देंगी.

This Article Posted on: April 22nd, 2012

good wirting sir , it is completely true , there is no doubt abuout it, but nothing happend any thing on this issue.

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
Image CAPTCHA
Enter the characters shown in the image.