केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए चल रहा है आंदोलन
गया : केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए आज घोषित गया बंद का मिलाजुला असर रहा. हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार संघर्ष समिति के संयोजक विजय कुमार मिठु ने बंद को सफल बनाया और कहा कि इससे मांग को और बल मिला है.
श्री मिठु ने कहा कि शहर में धारा 144 लागू रहने के कारण सुबह से ही जीबीरोड, गोदाम, टिकारी रोड, केपीरोड, स्वराज्य पुरी रोड, किरानी घाट आदि में लोगों से मिलकर बंद रखने का आह्वान किया गया था.
श्री मिठु ने कोच, टिकारी, परैया, गुरारु में भी बंद को सफल बताया है. शहर में श्री मिठु के अलावा युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा, शशि किशोर शिशु, महावीर शर्मा, सकलदेव सिंह, अरविंद कुमार सिंह, ममता कुमारी, संजू देवी, राम कुमार, मनीष कुमार, मो हनीफ व अन्य लोग शामिल थे.
श्री मिठु ने कहा कि 11 अप्रैल को संपूर्ण मगध प्रमंडल व 24 अप्रैल को संपूर्ण मध्य बिहार बंद कराया जायेगा. इसमें गया, नवादा, अरवल, औरंगाबाद, बक्सर, भभुआ, जमुई, मुंगेर, शेखपुरा, लक्खीसराय, रोहतास को बंद कराने का आह्वान जायेगा.
* महंगा पड़ेगा केंद्रीय विश्वविद्यालय का विरोध
गया : गया में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोले जाने का विरोध करना मुख्यमंत्री को महंगा पड़ेगा. इसका अंदाजा विश्वविद्यालय के मसले पर बुधवार को गया बंद की सफलता से ही लगाया जा सकता है.
इस बंद को समाज के हर तबके के लोगों का समर्थन मिला. यह दावा इंटक के प्रदेश सचिव अशोक सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के मसले पर तमाम मतभेदों के बावजूद लोग एकजुट हैं और रहेंगे.
श्री सिंह ने गुरारू चीनी मिल, गया कॉटन मिल और वारिसलीगंज चीनी मिल को एक वर्ष के अंदर खोलने का नीतीश कुमार की सरकार ने वादा किया था, जो गलत निकला. जनता सरकार के रुख-रवैये से भलीभांति अवगत है. अब जनता इनके झांसे में नहीं आनेवाली.
हमारे मुख्यमंत्री के व्यवहार से ऐसा लगता है जैसे उन्हें सिर्फ़ उत्तरी बिहार का ही वोट चाहिए और दक्षिणी बिहार से उन्हें कोई मतलब ही नही है. अगर ऐसा नही है तो वो गया का खुलकर विरोध क्यूँ कर रहे हैं?
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