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jamshedpur

  • Feb 17 2017 5:07AM

जनसुनवाई रद्द, नहीं आये अफसर

 लुआबासा. बिना सूचना नहीं आने वाले बीडीओ-बीपीओ-मेठ पर 1000 रुपये जुर्माना की अनुशंसा

इंतजार करती रही सोशल आडिट टीम
 
जमशेदपुर : लुआबासा पंचायत में मनरेगा की जनसुनवाई में जमशेदपुर बीडीओ समेत अन्य अधिकारी व बड़ी संख्या में मजदूर अनुपस्थित रहे. इस कारण जनसुनवाई रद्द कर दी गयी. 23 फरवरी को खैरबनी गांव में दोबारा जनसुनवाई की तिथि घोषित की गयी है. लुआबासा के खैरबनी गांव में सुबह 10 बजे से वर्ष 2015-16 में पूर्ण, चालू व लंबित योजनाओं की जनसुनवाई होनी थी, लेकिन दोपहर एक बजे तक बीडीओ, बीपीओ, मेठ, रोजगार सेवक व पंचायत सेवक बिना सूचना के अनुपस्थित रहे और मजदूर भी नहीं आये. हालांकि सुबह 10 बजे ही सोशल अॉडिट टीम, मुखिया, ग्राम प्रधान व रांची से आये राज्य एवं उच्चतम न्यायालय के सलाहकार बलराम के साथ 50 से अधिक ग्रामीण जनसुनवाई का इंतजार करते रहे.
 
बाद में सलाहकार बलराम ने अधिकारियों के रवैया पर कड़ी आपत्ति जतायी. उन्होंने खैरबनी मुखिया सिंगो मुर्मू, ग्राम प्रधान भागवन सोरेन, जुरी के सदस्य सह मजदूर प्रतिनिधि माइनो सोरेन समेत जनसुनवाई में शामिल लोगों से सलाह कर जनसुनवाई रद्द होने व दोबारा 23 फरवरी की तिथि की घोषणा की. बिना सूचना गायब रहने वाले पदाधिकारियों पर 1000 रुपये जुर्माना लगाने की अनुशंसा भी सलाहकार ने की है. जनसुनवाई की अनदेखी करना चिंताजनक. राज्य एवं  उच्चतम न्यायालय के सलाहकार बलराम ने कहा कि मनरेगा की जनसुनवाई में अधिकारी व मजदूर बिना सूचना के गायब थे, यह चिंतानजक है. यदि जनसुनवाई की अगली तिथि में स्थिति में सुधार नहीं होगा, तब आगे क्या करना है, इस पर सरकार निर्णय लेगी. सोशल अॉडिट टीम के अलावा उनके स्तर से सरकार को समय पर रिपोर्ट दी जायेगी. 
टीम ने मनरेगा अायुक्त व मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट
दोपहर एक बजे के बाद पहुंचे कुछ  पदाधिकारी
जनसुनवाई स्थल पर जमशेदपुर प्रखंड के पंचायती राज पदाधिकारी मनोज झा, जेइ रघुनाथ वर्मा समेत अन्य लोग दोपहर एक बजे पहुंचे. प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी ने बीमार होने का हवाला दिया अौर देर से आने के लिए माफी मांगी, जबकि जेइ रघुनाथ वर्मा ने काम में व्यस्त होने की बात कही. राज्य एवं उच्चतम न्यायालय के सलाहकार बलराम ने जेइ को फटकार भी लगाई.
 
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