नयी दिल्ली : देश में अगले पांच वर्षो में लगभग नौ करोड़ नयी नौकरियां मिलेंगी. एसोसिएट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) की ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट से यह उम्मीद जगी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण, व्यापार और मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में तेज प्रगति से वर्ष 2015 तक देश में  आठ करोड़ 73 लाख 70 हजार नयी नौकरियां सृजित होंगी.    उद्योग संगठन एसोचैम ने ‘भविष्य में रोजगार के नये अवसर’ पर अध्ययन रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक रोजगार देने के मामले में मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर (विनिर्माण क्षेत्र) अव्वल होगा. रोजगार जुटाने में इस क्षेत्र का हिस्सा 32 फीसदी रहने की संभावना है. इस क्षेत्र में रोजगार में एक फीसदी की वृद्धि का मतलब 6.25 लाख नये रोजगारों से है. व्यापार व निर्माण के क्षेत्र क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार के मामले में सबसे बड़ा योगदान करनेवाले कृषि क्षेत्र की भूमिका इस अवधि में सीमित रहेगी. कुल रोजगार के अवसरों में वित्तीय क्षेत्र की हिस्सेदारी 3.4 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ कर दोगुनी हो जायेगी. विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के पीछे वस्त्र उत्पाद, खाद्य उत्पाद, पेय, परिवहन उपकरण, धातु उत्पाद, चमड़ा उत्पाद और मशीनी उपकरणों का बड़ा योगदान रहेगा.  सूचना प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े क्षेत्रों में  रोजगार के लिहाज से 3.28 फीसदी की रफ्तार से सर्वाधिक तेज विकास होगा. इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के काफी अवसर पैदा होंगे.
 
बैंक ऑफ़ बड़ौदा में चार हजार नयी नियुक्तियां
जमशेदपुर : बैंक ऑफ बड़ौदा 2011 तक 4,000 नयी नियुक्तियां करेगा. इसकी प्रक्रिया शुरू हो गयी है. दक्ष लोगों को प्राथमिकता दी जायेगी. यह बात बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यकारी निदेशक एनएस श्रीनाथ ने रविवार को कही. श्रीनाथ ने बताया कि  झारखंड में बैंक शाखाओं का विस्तार होगा. अगले वर्ष तक 10-15 नयी शाखाएं खोली जायेंगी. 400 से अधिक नये एटीएम खोले जायेंगे. उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2010 से बैंक के बचत खाताधारकों को प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज मिलना शुरू हो जायेगा.
 
मलयेशिया : चाहिए एक लाख विदेशी कामगारक्वालालंपुर : मलयेशिया में भारतीय मूल के उद्योगपतियों को एक लाख विदेशी कामगारों की दरकार है. मलयेशियाई चैंबर के अध्यक्ष केके ईश्वरन ने कहा कि भारतीय रेस्टोरेंट, निर्माण क्षेत्र व बाजारों में इन कामगारों की जरूरत है, क्योंकि स्थानीय लोगों का अवसर खत्म हो चुका है. |