| नयी दिल्ली : कई वषाब से भारतीय हॉकी को उसके पुराने गौरवशाली अतीत में ले जाने की लगातार बातें की जाती रही हैं, लेकिन हॉकी विश्वकप में भारतीय टीम ने जैसा निराशाजनक प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि आखिर कैसे दिल दे हॉकी को. भारत हॉकी विश्वकप में आठवें स्थान पर रहा है. पूरे टूर्नामेंट में उसने छह मैचों में से मात्र एक मैच जीता, एक ड्रॉ खेला और चार मैच हारे. लीग में भारत ने एकमात्र जीत पाकिस्तान के खिलाफ़ अपने शुरूआती मैच में हासिल की थी. लेकिन पाकिस्तान की टीम इस टूर्नामेंट में 12 वें स्थान पर रही इसे देखते हुए अब भारत की अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ़ हासिल जीत पर किसी को आश्चर्य नहीं हो रहा है. इस जीत को छोड़ दिया जाए तो भारत, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, इंग्लैंड से हारा और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ़ उसका मैच ड्रॉ रहा. सातवें से आठवें स्थान के मैच के लिए भारत अजबटीना से 2-4 से पिट गया और उसने अजबटीना के खिलाफ़ पिछले 32 वषाब में विश्वकप में कोई मैच न जीत पाने का सिलसिला बरकरार रखा. भारत ने टूर्नामेंट में कुल 15 गोल किए और उसने 21 खोल खाए जो दसवें स्थान पर रहे दक्षिण अफ्रीका और 11 वें स्थान पर रहे कनाडा के बाद किसी टीम द्वारा खाए गए सर्वाधिक गोल हैं. भारतीय कोच होजे ब्रासा हर पराजय के बाद हार के लिए कोई न कोई बहाना ढूंढकर मीडिया के सामने आते रहे. उन्होंने तो यह तक भी साफ़ कर दिया कि विश्वकप उनका लक्ष्य नहीं था और सात महीने के अपने कार्यकाल में वह रातोंरात कोई चमत्कार नहीं कर सकते. उनका लक्ष्य तो अक्टूबर- नवंबर में होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं. |