नयी दिल्ली : गत दो बार के चैंपियन जर्मनी इंगलैंड के हाथों यूरोपीय चैंपियनशिप के फ़ाइनल में मिली हार को अभी तक भूल नहीं पाया है. गुरुवार को जब वह हीरो होंडा एफ़आइएच हॉकी विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में इसी टीम के खिलाफ़ उतरेगा, तो उसके जेहन में उस हार का बदला लेने के साथ-साथ लगातार तीसरी बार फ़ाइनल में पहुंचने का पक्का इरादा होगा. जर्मनी की नजरें बेशक इस विश्व कप में खिताबी हैटट्रिक बनाने पर टिकी हुई हैं, लेकिन उसके सामने एक ऐसी टीम की चुनौती है, जिसने इस टूर्नामेंट में जबरदस्त खेल दिखाया है और उसे खिताब के लिए छुपा रुस्तम माना जा रहा है. बात इंगलैंड की है, जिसने पूल बी में लगातार चार मैच जीत कर सबसे पहले सेमीफ़ाइनल में स्थान बनाया था. हालांकि इंगलैंड की टीम अपने अंतिम लीग मैच में स्पेन के हाथों 0-2 से पराजित हो गयी थी, लेकिन उसे किसी भी सूरत में कम तर नहीं आंका जा सकता. जर्मनी को इस बात का एहसास पूरी तरह है कि जो काम इंगलैंड ने यूरोपीय चैंपियनशिप में किया था, वही काम वह विश्व कप में भी कर सकता है. इसलिए गत चैंपियन को इस खतरनाक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ़ पूरी तरह सतर्क रहना होगा और उसे शुरुआती गोल देने से बचना होगा.ऑस्ट्रेलिया भिड़ेगा हॉलैंड सेतूफ़ानी प्रदर्शन कर रहे गत दो बार के उपविजेता ऑस्ट्रेलिया और अपने तीखे तेवरों से दावेदार माने जा रहे हॉलैंड के बीच दूसरे सेमीफ़ाइनल में विस्फ़ोटक मुकाबले की उम्मीद रहेगी. ऑस्ट्रेलिया ग्रुप बी में चोटी पर रहा है, जबकि हॉलैंड को पूल ए में दूसरा स्थान मिला है. ऑस्ट्रेलिया ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 23 गोल दागे हैं, वहीं हॉलैंड ने सबसे कम पांच गोल खाये हैं. ऑस्ट्रेलिया की आक्रामक फ़ॉरवर्ड पंक्ति और हॉलैंड के मजबूत डिफ़ेंस के बीच जोरदार मुकाबला होगा, लेकिन इन सबके बीच ऑस्ट्रेलिया को हॉलैंड के पेनल्टी कार्नर विशेषज्ञ ताइके ताइकामा से और हॉलैंड क ो ऑस्ट्रेलिया के पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ ल्यूक डोएरनर से सावधान रहना होगा.        ये दोनों ही खिलाड़ी छह-छह गोल कर टूर्नामेंट के अब तक के शीर्ष स्कोरर हैं. ऑस्ट्रेलियाई स्ट्राइकर जैमी डवेयर और ग्लेन टर्नर भी पांच-पांच गोल दाग चुके हैं. डेसमंड एबोट के खाते में चार गोल हैं. यानी ये खिलाड़ी हॉलैंड के लिए भी सिरदर्द बन सकते हैं. वहीं, हॉलैंड के रोनाल्ड ब्रावर (तीन गोल) और रोजियर हाफ़मैन (दो गोल) ऑस्ट्रेलियाई किले में सेंध लगा सकते हैं. जर्मनी ने अपने ग्रुप पूल ए में कोरिया से पहला मैच 2-2 से ड्रा खेलने के बाद शानदार वापसी करते हुए अगले चार में से तीन मैच जीत कर 11 अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया. उसका ग्रुप की दूसरे नंबर की टीम हॉलैंड के साथ मैच 2-2 से ड्रा रहा.इंगलैंड के खेल में आया फर्कजर्मनी ने अपने पांच मैचों में जहां 19 गोल दागे, वहीं उसने सिर्फ़ नौ गोल खाये. पूल बी में दूसरे नंबर पर रही इंगलैंड ने अपने पांच मैचों में 17 गोल दागे, लेकिन उसने 12 गोल भी खाये. पूल बी में इंगलैंड और ऑस्ट्रेलिया के एक बराबर 12-12 अंक थे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया बेहतर गोल अंतर के आधार पर ग्रुप में चोटी पर रहा. जर्मनी और इंगलैंड के बीच दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद की जा रही है. यूरोपीय शैली में खेलने वाली दोनों टीमें इस मैच में जीत के लिए अपना पूरा जोर  लगायेंगी.दोनों टीमों के बीच इससे पहले विश्व कप में एक बार मुकाबला हुआ था और 2006 के टूर्नामेंट में जर्मनी ने लीग मैच 2-1 से जीता था. लेकिन, पिछली बार की यूरोपीय चैंपियनशिप से इंगलैंड के खेल में काफ़ी फ़र्क आ चुका है और अचानक ही यह टीम मजबूत नजर आने लगी है. जानकार इसे खिताब का दावेदार भी बताने लगे हैं. लेकिन, जर्मनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ़ अपने आखिरी लीग मैच में जिस तरह किवी टीम को 5-2 से रौंदा, उससे यह बात तो तय है कि गत चैंपियन टीम अपनी पूरी लय में लौट चुकी है और उसे लगातार तीसरा फ़ाइनल खेलने से रोकने के लिए इंगलैंड को अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना होगा.ऐ जैक्सन से रहना होगा सावधानजर्मनी को सेमीफ़ाइनल में इंगलैंड के स्ट्राइकर ऐ जैक्सन से सावधान रहने की जरूरत है, जो तीन मैदानी और दो पेनल्टी कॉर्नर गोल सहित अब तक पांच गोल कर चुके हैं. इंगलैंड के जेम्स टिंडाल भी तीन गोलों के साथ खासे खतरनाक दिखाई दे रहे हैं. बैरी मिडल्टन और जोंटी क्लार्क भी जर्मनी के लिए खतरा बन सकते हैं. गत चैंपियन जर्मनी की तरफ़ से युवा खिलाड़ी 18 वर्षीय फ्लोरियन पुक्स ने अब तक कमाल का खेल दिखाते हुए सर्वाधिक चार गोल किये हैं. उनकी तेजी विपक्षी टीम को लगातार परेशान करनेवाली है. मार्टिन ज्वीकर दो गोल, मार्टिन होर दो गोल, जान माकरे मोंटाग दो गोल और मथायस विटहास दो गोल इंगलैंड के लिए सिरदर्द बन सकते हैं. जर्मनी की खास बात यह है कि डिफ़ेंस मिडफ़ील्ड और फ़ारवर्ड लाइन में उसके पास गजब का तालमेल है. इंग्लैंड अपने आखिरी लीग मैच में बेशक हार गया था, लेकिन यह माना जा रहा है कि सेमीफ़ाइनल सुनिश्चित हो जाने के बाद उसने अपनी ऊर्जा बचाने के उद्देश्य के साथ इस मैच में अपनी सारी ताकत नहीं लगायी थी. पिछले विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहा इंगलैंड 1986 के बाद से पहली बार सेमीफ़ाइनल में पहुंचा है और उसकी पूरी कोशिश फ़ाइनल में पहुंच कर 24 वर्ष पुराना इतिहास दोहराने की होगी, जबकि जर्मनी की टीम लगातार तीसरी बार फ़ाइनल में पहुंचने की फ़िराक में है. |