नयी दिल्ली : राज्यसभा की कार्यवाही कल पांच बार और आज तीन बार स्थगित होने के बाद महिला आरक्षण विधेयक पर सदन में पौने चार बजे बहस शुरु हुयी. समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी के सात निलंबित सांसदों को मार्शल के जरिए सदन से बाहर निकाले जाने के बाद सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने चर्चा की शुरुआत की. भारतीय जनता पार्टी इस विधेयक पर बहस कराने की सरकार से पहले ही मांग कर रही थी. श्री जेटली ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि आजादी के बाद 63 वषरे में 15 चुनावों के बाद संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सात से 11 प्रतिशत ही रहा. पन्द्रहवीं लोकसभा से उनका प्रतिशत 10.7 रहा. कुछ लोग यह कहते रहे कि लोकतंत्र में स्वाभाविक रुप से महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता जायेगा, पर हमने देखा कि ऐसा नहीं हुआ. इसलिए महिलाओं के लिए आरक्षण करने की जरुरत हुई क्योंकि 63 वषरे में स्थिति नहीं बदली और अगले 63 वषरे में भी यह स्थिति बदलने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि महिलाओं की आबादी 50 प्रतिशत है पर वे आर्थिक रुप से उन्हें दस प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाता है. भारत में करोड़पतियों की संख्या सबसे ज्यादा है पर दो तिहायी बच्चे बिना चिकित्सा सुविधा के ही मां की कोख से बाहर निकलते हैं. मातृत्व मृत्यु दर दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में है. 88 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं. हर साल पचास लाख भ्रूण हत्याएं होती हैं. महिला साक्षरता दर 53 प्रतिशत है जबकि पुरुष साक्षरता दर 76 प्रतिशत है. |