पटना : मद्य निषेध व उत्पाद विभाग में 500 करोड़ के  कथित घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग को ले कर विपक्ष ने मंगलवार को विधानसभा में हर कोशिश कर ली, किं तु सरकार नहीं मानी.मंगलवार को माले ने इस मामले को ले कर सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया था. माले के  अरुण सिंह ने कहा कि यह सरकार गांव-गांव में शराब की भट्ठियां खुलवा रही है, विधानसभा चुनाव में उसे जवाब देना होगा.  राजद के शकील अहमद खां ने कहा कि यह  कै सा विभाग है,  जिसमें चार वर्षो में तीन-तीन मंत्री     बदल गये.राजद के  अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि ऐसा पहला मामला है जिसे विपक्ष ने नहीं, सत्ता पक्ष ने उठाया है.  सच्चाई तो यह है कि मंत्री के आरोप लगाने से जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है.  कांग्रेस के  अशोक  कु मार ने कहा कि जमशेद अशरफ़ की ईमानदार छवि थी, फ़िर भी उन्हें बरखास्त कर दिया गया. पूर्व के  घोटाले की तरह इसकी भी सीबीआइ जांच हो.  लोजपा के  अनिल चौधरी ने शराब की बोतलों पर हॉलोग्राम नहीं चिपकाये जाने पर सवाल दागे. उन्होंने कहा कि मामले को दबाने-छुपाने में पूरी ताकत सरकार ने लगा दी है.  बसपा के  रामचंद्र सिंह ने कहा कि सूबे में उद्योग भले ही नहीं खुल पाये,  किं तु शराब उद्योग गांव-गांव में खुल गये.मुख्य सचिव के  पक्ष में खड़ी हुई सरकार !  विधानसभा में मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी के  पक्ष में सरकार पूरी ताकत के  साथ खड़ी रही.  मुख्यमंत्री नीतीश कु मार व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि उनके जैसा अधिकारी ढ़ू़ंढने पर भी नहीं मिलेगा.  नीतीश कु मार ने कहा कि चीफ़ सेक्रेटरी पर ेउन्हें पूरा भरोसा है.  यही वजह थी उन्होंने पूर्व मंत्री द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच          ब्यूरोक्रेट्स हेड  से करायी. सुशील मोदी ने कहा कि चीफ़ सेक्रे टरी अपनी निष्पक्षता के  लिए विख्यात हैं.  पत्नी की मौत के  बाद अगले दिन से ही उन्होंने सचिवालय में संचिकाओं का निष्पादन करना शुरू कर दिया. |