नयी दिल्ली : शीतल पेय अधिक मात्रा में पीने वाले लोगों के लिए यह खबर खतरे की घंटी है. एक नये अध्ययन से पता चला है कि जो लोग हर हफ्ते कम से कम दो बार मीठा शीतल पेय पीते हैं, उन्हें अग्नाशय का कैंसर होने का ज्यादा खतरा रहता है. अमेरिका की मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के सिंगापुर में रहने वाले साठ हजार से अधिक पुरुषों और महिलाओं पर किए गए 14 साल के अध्ययन के बाद निकला यह निष्कर्ष कैंसर एपिडेमियोलोजी, बायोमार्कर्स एडं प्रिवेंशन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में बताया गया है कि जो लोग हर सप्ताह दो या उससे अधिक बार मीठा शीतल पेय पीते हैं, उनमें इसे नहीं पीने वाले व्यक्तियों के मुकाबले अग्नाशय का कैंसर होने का खतरा 67 प्रतिशत तक अधिक रहता है. हालांकि शोधकर्ता इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि अग्नाशय के कैंसर के लिए शीतल पेय ही जिम्मेदार है या इन्हें पीने वाले व्यक्ति की अस्वस्थ जीवन शैली. कुछ अध्ययनों से पता लगा है कि शीतल पेय खून में शर्करा की मात्रा बढ़ा देते हैं जिससे अग्नाशय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है. ब्रिटेन में अग्नाशय का कैंसर ग्यारहवां सबसे आम कैंसर है, लेकिन यह कैंसर का सबसे खतरनाक रूप भी है जिससे हर साल 7700 व्यक्तियों की मौत हो जाती है. पिछले साल हॉलीवुड स्टार पैट्रिक स्वायज की इसी बीमारी से मौत हो गई थी. शोधकर्ताओं को अध्ययन की अवधि के दौरान अग्नाशय के कैंसर के 140 मामले मिले. इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ मार्क परेरा ने बताया कि नियमित रूप से मीठे शीतल पेय पीने वाले लोग अस्वास्थ्यकर भोजन करने लगते हैं और उनकी जीवनशैली बदतर होने की संभावना रहती है. डॉक्टर परेरा के अनुसार कैंसर और फ़लों के जूस के बीच कोई संबंध नहीं था लेकिन उनका मानना है कि शीतल पेय में शर्करा की अधिक मात्रा अग्न्याशय की बीमारी का कारण बन सकती है. शीतल पेय में शर्करा की अधिक मात्रा शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ा सकती है जिससे अग्नाशय कैंसर की कोशिकाओं में वृद्धि हो सकती है. उन्होंने कहा कि सिंगापुर दौलतमंद देश है जहां बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं. वहां समय बिताने के लिए पसंदीदा काम भोजन करना और शॉपिंग है. इसलिए अध्ययन के इस नतीजे को दूसरे पश्चिमी देशों पर लागू किया जाना चाहिए. |