| | बीटी बैंगन पर निर्णय आसान नहीं | | | |
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| | |  नयी दिल्ली : बीटी बैंगन को परीक्षण के बाद पूरी तरह निरापद घोषित कर दिए जाने के बावजूद देश भर में कई स्वयंसेवी संगठनों और प्रबुद्ध वर्ग के विरोध के कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए इसके व्यावसायिक उत्पादन के बारे में अंतिम निर्णय लेना आसान नहीं होगा. जेनेटिकल इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी (जीइएसी) बीटी बैंगन का परीक्षण करने के बाद पूरी तरह निरापद बताते हुए इसके व्यावसायिक उत्पादन की अनुशंसा कर चुकी है, लेकिन देश में इसके खिलाफ़ जो माहौल बन गया है उसे देखते हुए प्रधानमंत्री को 10 फ़रवरी को काफ़ी सोच समझकर फ़ैसला करना होगा. कृषि वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों समेत कई एनजीओ और किसान संगठन जिस तरह बीटी बैंगन को मानव स्वास्थ्य के लिए घातक बताते हुए इसके इस्तेमाल के लिए सरकार को चेता रहे हैं, इससे सरकार के लिए इस मुद्दे पर फ़िलहाल कोई निर्णय लेना आसान नहीं है. केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार बीटी बैंगन को किसानों के हित में बताते हुए इसे अनुमति दिए जाने के लिए कृतसंकल्प हैं. देशभर में इसके खिलाफ़ हो रहे विरोध को दरकिनार करते हुए हर हाल में जीइएसी की रिपोर्ट को लागू किए जाने के पक्ष में हैं. पर्यावरण मंत्रालय को इस रिपोर्ट को अंतिम स्वीकृति देनी थी, लेकिन केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने प्रारंभ में विशेषज्ञों और एनजीओ की आलोचनाओं को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया था कि कृषि मंत्रालय का निर्णय अंतिम नहीं है. इस पर अंतिम निर्णय सभी वर्ग के लोगों से विचार विमर्श के बाद ही लिया जाएगा. इसके लिए उन्होंने देश के सात शहरों में जनसुनवायी शुरु की लेकिन बीटी बैंगन के पक्ष में कृषि मंत्रालय के डटे रहने पर उन्होंने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री पर छोड़ दिया. हालांकि सातवीं जनसुनवायी में श्री रमेश ने जिस तल्खी से बीटी बैंगन के विरोधियों को जवाब दिए इससे इस बात की प्रबल संभावना है कि सरकार बीटी बैंगन के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति दे सकती है. |
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