वाशिंगटन : लावेल आबर्जवेटरी के अंतरिक्ष वैज्ञानिक डीडर हंटर ने 17 साल ग्लैक्सी को अध्ययन करने में लगाया. इस अध्ययन से डीडरे और उनके सहयोगियों को अंतरिक्ष में तारे कैसे बने इसका पता चल सका. हंटर और उनकी टीन ने गैलेक्सी की पहचान के लिए उससे निकालनेवाले गैस का अध्ययन शुरू किया. ताकि उन्हें सितारों के बनने की प्रक्रिया का पता चल सके. हंटर के मुताबिक गैस के बादलों से तारे बने हैं. हम यही जानने की कोशिश कर रहे हैं कि गैलेक्सी में कौन सी प्रक्रिया के जरिये इसका निर्माण हुआ है. हंटर की टीम लगातार 41 छोटी-छोटी गैलेक्सी का अध्ययन करने में लगी हुई है. वैसे तारों के निर्माण की प्रक्रिया काफ़ी समृद्ध नहीं है क्योंकि तारों के बनने में जिन मॉलीक्यूलर गैस के बादलों का प्रयोग होता है. उसकी 50 से 90 फ़ीसदी गैस, तारों के बनने के बाद भी गैलेक्सी में मौजूद रहती हैं और यह बचे हुए गैस से नेबुले बनता है. नेबुले किसी साइनपोस्ट की तरह होता है जो यह बताने में मददगार साबित होता है कि यहां पर कोई तारा है. सामान्य बोल चाल की भाषा में पृथ्वी पर मौसमी बादलों की तरह ही यह होता है. हंटर के एक सहयोगी मेगान जैक्सन तारों में मोशन, उनकी वेलोसिटी और उनके रोटेशन पर भी अध्ययन कर रहे हैं. |