| | ऑस्ट्रेलिया में अकुशल श्रमिकों को जगह नहीं | | | |
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| | | कैनबरा : ब्रिटेन द्वारा वीजा नियम सख्त किये जाने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों से आने वाले श्रमिकों पर बड़ी चोट करते हुए अकुशल श्रमिकों के 20 हजार आवेदनों को अस्वीकार करने का फ़ैसला किया है. सरकार के इस निर्णय का असर यहां पढ़ रहे हजारों एशियाई छात्रों पर पड़ने की संभावना है. खासतौर से उन छात्रों पर जो ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न निजी संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां छोटे-मोटे कामों के जरिए रोजगार हासिल करने की कोशिश करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री क्रिस इवांस ने आज एक रेडियो कार्यक्रम में कहा कि हमारे यहां हजारों विदेशी छात्र पाक कला, लेखा प्रबंधन और केशसज्जा का प्रशिक्षण ले रहे हैं क्योंकि इसके जरिए वे यहां की स्थायी नागरिकता हासिल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कुशल श्रमिकों को देश में लाना चाहती है. श्री इवांस ने कहा कि पिछले वर्ष एक लाख 70 हजार लोगों ने ऑस्ट्रेलिया में रहने और स्थायी तौर पर काम करने के लिए आवेदन दिया था जबकि केवल एक लाख आठ हजार जगहें ही खाली थी. ऑस्ट्रेलिया के खनन उद्योग ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है. खनन कंपनियों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया को नयी परियोजनाओं के लिए हजारों कुशल श्रमिकों की जरूरत है जिसमें 39 अरब डॉलर की गोर्गन प्राकृतिक गैस परियोजना भी शामिल है. ऑस्ट्रेलियाई खनन एवं धातु संगठन के प्रमुख स्टीव नाट ने कहा कि देश के संसाधन क्षेत्र में वृद्धि हो रही है ऐसे में कुशल श्रमिकों को बढ़ावा देने के सरकार के निर्णय का हम स्वागत करते हैं. ऑस्टेलिया सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन ने भी अपने यहां छात्र वीजा नियम सख्त करने की घोषणा की है. |
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