| | असमय बुढ़ापे के लिए टीइआरसी जीन जिम्मेवार | | | |
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| |  लंदन : हालैण्ड और ब्रिटेन के जीव वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों के असमय वृद्ध होने के जिम्मेदार विशेष आनुवांशिक विभिन्नताओं को खोजने का दावा किया है. उनका मानना है कि इससे कैंसर और आयु संबंधित बीमारियों को समझने मेंं काफ़ी मदद मिलेगी. हॉलैण्ड और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने आनुवांशिक विभिन्नता वाली पांच लाख से अधिक मानवीय जीन संरचनाओं का अध्ययन किया और पाया कि जिन लोगों में टीइआरसी जीन होते हैं. वे लोग सम्भवत: अन्य के मुकाबले तीन से चार वर्ष पहले वृद्ध हो जाते हैं. किंग्स कॉलेज लंदन के टीम स्पेक्टर ने कहा कि हमारे अध्ययन से मालूम होता है कि कुछ लोग आनुवांशिक तौर पर बहुत ही जल्द वृद्ध होते हैं. उन लोगों में विभिन्नताओं के साथ यह प्रभाव काफ़ी विचारणीय है. श्री स्पेक्टर अध्ययन दल के सह नेतृत्वकर्ता हैं. नेचर जेनेटिक्स जनरल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने बताया है कि लोग दो तरह से वृद्ध होते हैं. पहला, क्रमवार बुढ़ापा यानी जिसको हम एक से 100 तक वषाब के क्रम में गिनते हैं़ और दूसरा जैविक बुढ़ापा, जिसमें कुछ लोगों की कोशिकाएं उनके क्रमवार आयु के मुकाबले पुरानी या नयी हैं. अध्ययन दल में शामिल ब्रिटेन के लिसेस्टर विश्वविद्यालय के हृदय रोग विज्ञान के प्रोफ़ेसर निलेश सामानी ने बताया कि हृदय रोग समेत बुढापे संबंधी बीमारियां और कुछ तरह के कैंसर क्रमवार बुढ़ापे की अपेक्षा जैविक बुढ़ापे के ज्यादा करीब हैं. शोधकर्ता टेलोमेर्स का अध्ययन कर रहे हैं जो क्रोमोसोम के सिरों को सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा टेलोमेर्स की लंबाई के कारण ही कोशिकाएं वृद्ध होती हैं. वैज्ञानिक कुछ समय से जान चुके हैं कि टीइआरसी जीन बुढ़ापा और कैंसर के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं जो टेलोमेर्स की लंबाई को नियंत्रित करते हैं लेकिन श्री स्पेक्टर ने कहा कि इस अध्ययन का महत्व यह है कि यह मानव शरीर में टीइआरसी के विशेष विभिन्नताओं को सामने लाया है. इससे मालूम हुआ है कि संभवत यह असमय बुढ़ापे का कारण है. |
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