नयी दिल्ली  केंद्र सरकार ने दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा पर नियंत्रण पाने के लिए उसे किसी भी राज्य में हस्तक्षेप करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है.  केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री वीरप्पा मोईली ने यहां न्यायविदों, न्यायाधीशों और कानूनविदों के सम्मेलन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 51 (सी) के तहत अंतरराष्ट्रीय मानवता कानूनों को प्रोत्साहन एवं संरक्षण देना केंद्र का संवैधानिक दायित्व है. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 356 के तहत भी केंद्र आतंरिक गड़बड़ी की स्थिति में राज्यों में हर नागरिक की सुरक्षा करने के लिए संवैधानिक प से बाध्य है.वैधानिक निकाय बनेगाऐसा माना जा रहा है कि सरकार शीघ्र ही एक विधेयक लायेगी, जिसके तहत इन मामलों से निबटने के लिए एक स्वतंत्र स्थायी वैधानिक निकाय की स्थापना की जायेगी. लेकिन, कानून-व्यवस्था राज्य का विषय होने की वजह से राज्य सरकारें सांप्रदायिक/जातीय हिंसा की स्थिति में कें द्र द्वारा हस्तक्षेप का पुरजोर विरोध कर रही हैं. दरअसल वर्ष 2002 के गुजरात और 1993 के मुंबई दंगों के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के जान-माल की रक्षा करने में विफ़ल रहने के कारण केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना हुई थी और प्रस्तावित विधेयक को इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक कदम बताया जा रहा है. |